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Sankata naashan Ganesh stotram ; संकटनाशन.. हिंदी !

Sankata naashan Ganesh stotram ; संकट नाशन गणेश स्तोत्र सभी कष्टों का निवारण करता है तथा जो भी व्यक्ति 11 या 21 दिनों तक विधिवत संकल्प लेकर के इस स्त्रोत का पाठ करता है उसके जीवन से सभी संकटों का नाश हो जाता है और वह सभी क्षेत्रों में सिध्दि एवं सफलता प्राप्त करता है। बुधवार का दिन श्री गणेश जी का विशेष दिन होता है तथा चतुर्थी तिथि प्रिय तिथि मानी जाती है ।

ऐसे में प्रत्येक बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिनों में इस स्त्रोत का पाठ करना विशेष फलदाई माना जाता है। संकल्प के साथ अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए Sankata naashan Ganesh stotram संकटनाशन गणेश स्त्रोत का पाठ अवश्य करना चाहिए। जो भी व्यक्ति इसका पाठ करता है उसके सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं। गणेश उत्सव के विशेष अवसर पर आपके लिए संस्कृत, अंग्रेजी में भी पढ़ सकेंगे तथा इसका हिंदी अर्थ भी जानेगें ताकि अधिक आसानी से इसे अपना सकें।

Sankata naashan Ganesh stotram ; संकट नाशन गणेश स्त्रोत !

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।।

भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।१ ।।

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।।

तृतीयं कृष्णपिङ्गगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।२ ।।

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।।

सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।३ ।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।।४ ।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।

न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।५ ।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।

पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।६ ।।

जपेत् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।

संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।७ ।।

अष्टाभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत् ।

तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।।८ ।।

इति श्री नारद पुराणे संकट विनाशनं श्रीगणपति स्तोत्रं संपूर्णम्!!

Sankata naashan Ganesh stotram in english !!

Pranamya shirasa devam Gauri putram Vinayakam.
Bhakthavasam smarenityamayuh kama artha sidhaye ||1||

Prathamam Vakratundam cha, Ekadantam dwitiyakam.
Tritiyam Krushna Pingaksham,Gajavaktram Chaturthakam ||2||

Lambodaram Panchamam cha ,Sashtam Vikatamev cha.
Saptamam Vignarajam cha,Dhoomravarnam tathashtamam ||3||

Navamam Bhalchandram cha, Dashamam tu Vinayakam.
Ekadasham Ganapatim, Dwadasham tu Gajananam ||4||

Dwadasaithani namani,Trisandhyam yah pathenara.
Na cha vighna bhayam tasya,Sarvsiddhi karam param ||5||

Vidhyarthi labhate Vidhyam,Danarthi labhate Dhanam.
Putrarthi labhate Putran, Moksharthi labhate Gateem ||6||

Japet Ganapati stotram,Shadbhirmasai phalam labheth.
Samvatsarena sidhim cha, Labhate natra sanshaya ||7||

Ashtabhyo Brahmanebhyash Likihitwa yh samarpayet.
Tasya Vidhya bhavetsarva Ganeshasya Prasadatah ||8||


|| Iti Shri Narad Purane Sankat nashanam Ganesha Stotram Sampurnam ||

श्री गणेश स्तोत्रम का हिंदी अर्थ !

नारद जी कहते हैं,

1- पार्वतीनन्दन श्रीगणेश जी को, सिर झुकाकर प्रणाम करे। फिर,अपनी आयु, कामना और अर्थ की सिद्धि के लिये, उन भक्त निवास का (श्रीगणेशजीका), नित्य स्मरण करें।

2- पहला वक्रतुण्ड, दूसरा एकदन्त, तीसरा कृष्णपिंगाक्ष,
चौथा गजवक्त्र, ( कृष्णपिंगाक्ष अर्थात – काली और भूरी आंखोवाले, गजवक्त्रं अर्थात – हाथीके से मुखवाले)

3- पाँचवां लम्बोदर, छठा विकट, सातवाँ विघ्नराजेन्द्र,
आठवाँ धूम्रवर्णं ( लम्बोदर अर्थात – बड़े पेटवाले, विकट अर्थात – विराट, विघ्नराजेन्द्र अर्थात – विघ्नोका नाश करने वाले राजाधिराज)

4- नवाँ भालचन्द्र,दसवाँ विनायक,ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन ( भालचन्द्र अर्थात – जिसके ललाटपर चंद्रमा सुशोभित है

5- इन बारह नामों का जो व्यक्ति तीनों संध्याओं में
अर्थात प्रात:, मध्याह्न और सायंकाल में पाठ करता है,
उसे किसी भी तरह के विघ्न का भय नहीं रहता है।इस प्रकार का स्मरण सब प्रकार की सिद्धियाँ देनेवाला है।

6- इससे विद्याभिलाषी (विद्यार्थी) विद्या, धनार्थी (धन के अभिलाषी) धन,पुत्रार्थी (पुत्र की इच्छा वाले) पुत्र तथा
मुमुक्षु मोक्षगति प्राप्त कर लेता है।

7- इस गणपति स्तोत्र का जाप करे तो छह महीने में इच्छित फल प्राप्त होता है और एक वर्ष में पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो जाती है, इसमें किसी प्रकार का सन्देह नहीं है।

8- जो पुरुष इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पण करता है, गणेशजी की कृपासे उसे सब प्रकार की विद्या प्राप्त हो जाती है।

इस प्रकार श्रीनारद पुराण में लिखा,
श्रीसंकटनाशन गणेशस्तोत्र सम्पूर्ण हुआ।

http://Indiantreasure.in

https://youtu.be/vEuV3U3BFfQ

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