Total Post View :- 235

mahashivratri vrat पर्व; भोलेनाथ की प्रसन्नता के लिए करें तीन काम !

mahashivratri vrat महाशिवरात्रि व्रत पर्व भगवान शिव की प्रिय रात्रि कहलाती है। इस दिन भगवान शिव का महादेवी मां पार्वती से विवाह संपन्न हुआ था। ऐसा माना जाता है कि mahashivratri vrat के दिन जो जागरण करता है वह भगवान शिव को प्रसन्न करता है।

भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता है। अथवा पूर्ण भक्ति और श्रद्धा के साथ जो भी शिव का ध्यान करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां भगवती की कृपा और भोलेनाथ का आशीर्वाद दोनों ही प्राप्त हो जाते हैं।

आज हम आपको mahashivratri vrat में किए जाने वाले तीन ऐसे कार्य बताएंगे जो शिव की प्रसन्नता प्रदान करते हैं।

mahashivratri vrat पर्व पर भोलेनाथ की प्रसन्नता के लिए करें तीन काम !

1- भगवान शिव का मूल मंत्र पंचाक्षरी मंत्र है जो “ओम नमः शिवाय” है। mahashivratri vrat के दिन और निशीथ काल में भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए अधिक से अधिक संख्या में ओम नमः शिवाय का जप करना चाहिए । इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

2- भगवान शिव को भगवान राम के भक्त अति प्रिय होते हैं। भगवान स्वयं श्री राम की आराधना करते हैं। भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाली बेल पत्री में राम नाम लिखकर उन्हें समर्पित करना चाहिए। mahashivratri vrat के दिन बेलपत्र चढ़ाते समय निम्न मंत्र का स्मरण बोलकर करना चाहिए

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्

त्रिजन्मपाप संहारं बिल्वपत्रम शिवार्पणम् ॥

बिल्वपत्र समर्पण मंत्र

अर्थ- इस मंत्र का अर्थ है कि 3 गुण और तीन नेत्रों वाले और त्रिशूल को धारण करने वाले, 3 जन्मों के पापों का संहार करने वाले, हे भगवान शिव आपको यह बिल्वपत्र समर्पित करती/ करता हूँ।

3- भगवान शिव की पूजा में बालू की शिवलिंग का बहुत महत्व होता है। अतः अपनी सामर्थ्य अनुसार अधिक से अधिक संख्या में ( कम से कम 108) शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग बालू के बनाने चाहिए।

शिवलिंग का निर्माण कैसे करें

शिवलिंग बनाने के लिए किसी सुरक्षित स्थान से बालू लाएं। उस में गंगा जल व अष्टगंध, कपूर इत्यादि मिलाकर बालू को सुगंधित और पवित्र बना लें। इसके पश्चात छोटी-छोटी शिवलिंग का निर्माण करें । शिवलिंग का निर्माण करते समय ओम नमः शिवाय पंचाक्षरी मंत्र का जप करना चाहिए।

mahashivratri vrat पर्व पर पूजा के पश्चात क्या करना चाहिए

तीनपहर शिवजी ( mahashivratri vrat) की पूजा के पश्चात, घर पर ही एक टब में सुगंधित जल भर कर, पुष्प पत्र डालकर उसमें समस्त शिवलिंग का विसर्जन कर देना चाहिए। उक्त बालू को घर के ही बगीचे में डाल दें।

दो शब्द

भक्ति के अनेक रूप होते हैं उनके नाम जिस तरह की सेवा श्रद्धा और भक्ति में आपका मन प्रसन्न हो उड़ता हो वही भक्ति करें। क्योंकि आपकी प्रसन्नता ही ईश्वर की प्रसन्नता होती है। भक्ति में किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

गीता में कहा है कि भगवान के पास पहुंचने की तीन मार्ग है जिसमें भक्ति मार्ग सबसे प्रथम है फिर ज्ञान मार्ग और अंत में कर्म योग है । सच्ची भाव से लिया गया भगवान का नाम ही संपूर्ण पूजा का फल प्रदान करता है।

आशा है आपको हमारा यह mahashivratri vrat पर्व से संबंधित आर्टिकल अवश्य पसंद आया होगा। अपने विचार हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य प्रेषित करें।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!