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जानिए कैसे करें मौनव्रत !

जानिए कैसे करें मौनव्रत ! नियम और लाभ के संदर्भ मे अद्भुत व जानकारियों भरा लेख प्रस्तुत है।

जिसे अपनाकर आप अवश्य लाभान्वित होंगे।इस व्रत के द्वारा जीवन में अभीष्ट सिद्धियों को प्राप्त किया जा सकता है।

इसे कभी भी, किसी भी दिन से, किसी भी तिथि और मुहूर्त में, किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रारंभ किया जा सकता है।

मौनव्रत के प्रकार ! Types of silence!

  1. वाणी से व्रत।
  2. मन से व्रत।

1-वाणी से व्रत! voice fast!

  • वाणी से व्रत में हम केवल अपनी वाणी को विराम देते हैं ,और लिखकर या इशारों से बात करते हैं।
  • इसे कार्यों को करते हुए भी कर सकते हैं। कुछ लोग भोजन के समय भी मौन रहते हैं।
  • इसमें केवल शाब्दिक मौन होता है,इसका असर स्थूल रूप से होता है।जिससे केवल भौतिक रूप से ही लाभ होता है।

वाणी से व्रत के लाभ! Benefits of fasting from speech!

  • जब हम वाणी से मौन होते हैं तो उस समय में होने वाली घटना या कार्यवाही में हमारी वाणी हिस्सा नहीं लेती है।
  • और तब हम वाणी से होने वाले अपराध से बच जाते हैं। मौन व्रत से कई बार बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं भी टल जाती हैं।
  • तथा अनेक ऐसे प्रसंग भी उपस्थित होते हैं जिनके कारण वाणी से दुरुपयोग के कारण रिश्ते बिगड़ जाते हैं।
  • किंतु यदि ऐसे समय संयम रखकर मौन व्रत का पालन किया जाए तो हम उन रिश्तो को बचा सकते हैं।
  • शुरुआत में केवल वाणी से संयम रखते हुए मौन व्रत का पालन प्रारंभ किया जाना चाहिए।

2-मन से व्रत! Fasting from the mind!

  • इसमें पूर्णतः मौन रहा जाता है। यह बड़ी कठिन साधना होती है। ऐसे व्रती को ही मुनि कहते हैं।
  • इसमें एकांत सेवन करते हुए , व्रत की अवधि में निराहार रह कर किया जाता है।
  • सभी विचारों को नियंत्रित कर मन-क्रम-वचन से केवल परमात्मा का ध्यान किया जाता है।
मौन जीवन की उपलब्धि है।

मन से व्रत के लाभ! Benefits of fasting from the mind!

  • मन से मौन अत्यंत गंभीर और गूढ़ प्रक्रिया है। जिसके द्वारा हम मन में उठने वाले विचारों को नियंत्रित करते हैं।
  • इस व्रत की अवस्था में पूरा ध्यान ईश्वर की ओर लगा रहता है। ऐसे मौन व्रत में अंदर की शक्तियां जागृत होती हैं।
  • तथा वाणी में विलक्षणता उत्पन्न होती है। व्यक्ति जो कहता है वह सत्य होने लगता है।
  • उसे अपने पूर्व जन्मों का आभास भी हो सकता है। किंतु यह निरंतर व लंबे अभ्यास के बाद ही उत्पन्न होता है। जानिए कैसे करें मौनव्रत !

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मौनव्रत के नियम! Rules of silence!

  • यह व्रत निश्चित व नियमित रूप से किया जाना चाहिए ।इसे करते समय हमारा ध्यान एकाग्र होना चाहिए।
  • व्रत अवधि में किसी प्रकार का भोजन नहीं करना चाहिए ।इस समय केवल दूध या फल लिया जा सकता है।
  • व्रत के समय किसी भी गतिविधि में हिस्सा न लें।व्रत के समय ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
  • या गुरु मंत्र का जप पूरी तन्मयता के साथ करना चाहिए। अतः अवश्य जानिए कैसे करें मौनव्रत !

कैसे करें मौनव्रत ! How to silence!

  • मौनव्रत माह में एक दिन, अथवा 15 दिन में 1 दिन या सप्ताह में 1 दिन जिस भी प्रकार से संभव हो सके करें।
  • जैसे पहले माह में प्रति सातवें दिन, फिर दूसरे माह में प्रति छठे दिन, फिर तीसरे माह में प्रति पांचवे दिन।
  • इसी प्रकार क्रमशः चौथे दिन, तीसरे दिन, दूसरे दिन और प्रतिदिन का व्रत साधन करें।
  • लगभग 1 घंटा कम से कम सुबह या शाम के समय किया नियमित करना चाहिए।
  • यह व्रत आपकी स्वयं के प्रति और अपनी अंतरात्मा के प्रति आस्था होती हैअतः इसे पूरी ईमानदारी से करें।

यह ना करें! Do not do this!

  • इसमें व्रत के समय किसी भी वार्तालाप को ना सुने ना उसमें हिस्सा लें।
  • मौन की अवस्था में किसी भी प्रकार के इशारे बाजी या लिखित वार्तालाप नहीं किया जाना चाहिए।
  • किसी भी स्थिति में व्रत को संकल्प के समय अचानक ना तोड़े!
  • टीवी के सामने बैठकर या मोबाइल चलाते हुए या मीटिंग में बैठकर मौन व्रत नहीं किया जाना चाहिए।
प्रतिदिन कुछ पल का मौन आवश्यक है।

यह करें! Do it!

  • जितना गहरा और गंभीर आपका व्रत होगा उतने ही गहरे, गंभीर व लाभकारी परिणाम आपको प्राप्त होंगे।
  • यह एकांत में या बगीचे में बैठकर किया जाना चाहिए।
  • इस समय केवल भगवान का स्मरण करना चाहिए।
  • पूरी तरह समस्त इन्द्रियों को व्रत अवधि में नियंत्रित रखें।
  • मौन में उपवास करें। व संयमित रहें।अतः सही तरीका जानिए कैसे करें मौनव्रत !
  • यह हमें प्रकृति के नजदीक लाता है और इससे हमारे मन में प्रकृति के ही समान कोमल व शुद्ध विचार उत्पन्न होते हैं।

अवश्य पढ़ें?कैसे करें जीवन मे मौन का वरण ?

मौनव्रत की उपयोगिता ! Usefulness of silence!

  • आपके अंदरुनी शक्तियों को बढ़ाने वाला होता है।
  • संभव हो सके तो ऐसा अभ्यास करें के सप्ताह में एक दिन अवश्य ही 1 घंटे का मौनव्रत धारण करें।
  • इससे आप देखेंगे कि जैसे ही आप अपनी वाणी को संयमित करते हैं, वैसे ही आपका मन स्थिर होता जाता है।
  • वाणी का संयम बहुत बड़ा संयम होता है। जिसने जिव्ह्या को जीत लिया,उसे दुनिया के सभी लक्ष्य साध्य हो जाते है।
  • अतः इसे अपनाकर जीवन से अंधकार को मिटाकर सुख शांति व संतोष पाकर जीवन में श्रेष्ठतम ऊंचाइयों को पाएं।

!जय श्री कृष्णा!

मौनव्रत मानव जीवन की बहुत बड़ी साधना है। जिसने भी इसे साध लिया, समझिए उसने सबकुछ जीत लिया।

इसलिए जरूर जानिए कैसे करें मौनव्रत ! इस आर्टिकल में इसका महत्व, प्रकार, व्रत करने का तरीका सभीकुछ बताया गया है।

आपको यह अद्भुत जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अधिक से अधिक लोगों में शेयर करें। ताकि सभी के जीवन मे सुख शांति हो सके।

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