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Vaishakh – वैशाख मास का महत्व; कौन से दान करें

vaishakh – वैशाख मास का महत्व |Significance of Vaishakh month. भगवान विष्णु को परम प्रिय मास अक्षय पुण्यों को देने वाला है। जिसकी महिमा स्वयं ब्रम्हाजी के पुत्र महर्षि नारद जी ने की।

आज हम आपको नारदजी द्वारा राजा अम्बरीष को वैशाख मास के महत्व व इस मास में किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के दान बताएंगे।

उन विभिन्न दान के होने वाले पुण्य फल का वर्णन भी करेंगे । आइए जानते हैं वैशाख (vaishakh ) का वृतांत

नारद जी का राजा अम्बरीष से संवाद

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥

‘भगवान् नारायण, नरश्रेष्ठ नर देवी सरस्वती तथा महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके भगवान की विजय कथा से परिपूर्ण इतिहास पुराण आदि का पाठ करना चाहिये।

सूतजी कहते हैं- राजा अम्बरीष ने परमेष्ठी ब्रह्मा के पुत्र देवर्षि नारद से पुण्यमय वैशाखमास का माहात्म्य इस प्रकार पूछा- ‘ब्रह्मन्! मैंने आपसे सभी महीनों का माहात्म्य सुना।

उस समय आपने यह कहा था कि सब महीनों में वैशाखमास (vaishakh) श्रेष्ठ है। इसलिये यह बताने की कृपा करें कि वैशाख (vaishakh) मास क्यों भगवान् विष्णु को प्रिय है, और उस समय कौन-कौन से धर्म भगवान् विष्णु के लिये प्रीतिकारक हैं ?’

नारदजी ने कहा-वैशाखमास (vaishakh maas) को ब्रह्माजी ने सब मासों में उत्तम सिद्ध किया है। वह माता की भाँति सब जीवों को सदा अभीष्ट वस्तु प्रदान करने वाला है।

धर्म, यज्ञ, क्रिया और तपस्या का सार है। सम्पूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। जैसे विद्याओं में वेद-विद्या, मन्त्रों में प्रणव, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु,

देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, प्रिय वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगाजी, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में सुवर्ण, वैष्णवों में शिव तथा रत्नों में कौस्तुभ मणि है,

उसी प्रकार धर्म के साधनभूत महीनों में वैशाख मास (vaishak maas) सबसे उत्तम है। संसार में इसके समान भगवान् विष्णु को प्रसन्न करनेवाला दूसरा कोई मास नही |

वैशाख (vaishakh) मास का प्रमुख नियम

  • जो मनुष्य सूर्योदय से पहले स्नान करता है, उससे भगवान् विष्णु निरन्तर प्रीति करते हैं।
  • पाप तभीतक गर्जते हैं, जबतक जीव वैशाखमास में प्रातःकाल जल में स्नान नहीं करता।
  • वैशाख के महीने में सब तीर्थ आदि देवता (तीर्थके अतिरिक्त) बाहर के जल में भी सदैव स्थित रहते हैं।
  • भगवान् विष्णु की आज्ञा से मनुष्यों का कल्याण करने के लिये वे सूर्योदय से लेकर छ: दण्ड के भीतर तक वहाँ मौजूद रहते हैं।
  • पवित्र वैशाख (vaishakh) माह का प्रमुख नियम प्रातःकाल स्नान है।

वैशाख (vaishakha) मास का महत्व

  • विष्णु जी को प्रिय वैशाख (vaishakh) के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है,
  • वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।
  • जल के समान दान नहीं है. खेती के समान धन नहीं है और जीवन से बढ़कर कोई लाभ नहीं है।
  • उपवास के समान कोई तप नहीं, दान से बढ़कर कोई सुख नहीं, दयाके समान धर्म नहीं,
  • धर्म के समान मित्र नहीं, सत्य के समान बन्धु नहीं, आरोग्य के समान उन्नति नहीं, भगवान् विष्णु से बढ़कर कोई रक्षक नहीं और,
  • वैशाखमास के समान संसार में कोई पवित्र मास नहीं है। ऐसा विद्वान् पुरुषों का मत है।
  • वैशाख श्रेष्ठ मास है और शेषशायी भगवान् विष्णु को सदा प्रिय है।

वैशाख (vaishakh) माहमें दान का फल

जलदान का महत्व

  • सब दानों से जो पुण्य होता है और सब तीर्थों में जो फल होता है, उसी को मनुष्य वैशाख मास में केवल जलदान करके प्राप्त कर लेता है।
  • जो जलदान में असमर्थ है, ऐसे ऐश्वर्य की अभिलाषा रखने वाले पुरुष को उचित है प्रबोध करे, दूसरे को जलदान का महत्त्व समझावे।
  • यह सब दानों से बढ़कर हितकारी है। जो मनुष्य वैशाख मे सड़क पर यात्रियों के लिये प्याऊ लगाता है,
  • वह विष्णुलोकमें प्रतिष्ठित होता है।
  • प्रपादान (पौंसला या प्याऊ) देवताओं, पितरों तथा ऋषियों को अत्यन्त प्रीति देने वाला है।
  • जिसने प्याऊ लगाकर रास्ते के थके-माँदे मनुष्यों को सन्तुष्ट किया है,
  • उसने ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि देवताओं को सन्तुष्ट कर लिया है।
  • वैशाख मास में जल की इच्छा रखने वाले को जल, छाया चाहने वाले को छाता
  • और पंखे की इच्छा रखने वाले को पंखा देना चाहिये ।
  • जो प्यास से पीड़ित महात्मा पुरुष के लिये शीतल जल प्रदान करता है,
  • वह उतने ही मात्र से दस हजार राजसूय यज्ञों का फल पाता है।

पंखा दान का महत्व

  • धूप और परिश्रम से पीड़ित ब्राह्मण को जो पंखा डुलाकर हवा करता है,
  • वह उतने ही मात्र से निष्पाप होकर भगवान का पार्षद हो जाता है।
  • जो मार्ग से थके हुए श्रेष्ठ द्विज को वस्त्र से भी हवा करता है,
  • वह उतने से ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है।
  • जो शुद्ध चित्त से ताड़ का पंखा देता है, वह सब पापों का नाश करके ब्रह्मलोक को जाता है।

पादुका दान का महत्व

  • जो विष्णु प्रिय वैशाख मास में पादुका दान करता है, वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक में जाता है।

आश्रयदान का महत्व

  • जो मार्ग में अनाथों के ठहरने लिये विश्रामशाला बनवाता है, उसके पुण्य फल का वर्णन किया नहीं जा सकता।
  • मध्याह्न में आये हुए ब्राह्मण |अतिथि को यदि कोई भोजन दे, तो उसके फल का अन्त नहीं है।
  • जो मनुष्य मार्ग के थके हुए ब्राह्मण के लिये आश्रय देता है, उसके पुण्य फल का वर्णन किया नहीं जा सकता।

अन्नदान का महत्व

  • अन्नदान मनुष्योंको तत्काल तृप्त करने वाला है, इसलिये संसार में अन्न के समान कोई दान नहीं है।
  • जो अन्नदाता है, वह माता-पिता आदि का भी विस्मरण करा देता है।
  • इसलिये तीनों लोकों के निवासी अन्नदान की ही प्रशंसा करते हैं।
  • माता और पिता केवल जन्म के हेतु हैं, पर जो अन्न देकर पालन करता है, मनीषी पुरुष इस लोक में उसी को पिता कहते हैं।

निष्कर्ष (vaishakh maas)

आशा है आपको vaishakh maas ka mahatmya |वैशाख मास का महात्म्य सम्बन्धी लेख अवश्य अच्छा लगा होगा।
अपना कीमती समय निकाल कर vaishakh mass ka mahatmya |वैशाख मास का महात्म्य पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

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