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Purandaan – How To Donate Puran ; पुराण ग्रंथों का दान करने की विधि और महत्व

Purandaan – How To Donate Puran ; पुराण ग्रंथों का दान करने की विधि और महत्व; दान अपने आप में एक बहुत ही पवित्र प्रक्रिया या धारणा है। किसी भी व्यक्ति की आवश्यकता की पूर्ति किसी भी साधन द्वारा करना ही दान (daan) कहलाता है।

यह दान बिना किसी अनुग्रह या प्रतिफल के किया जाता है। दान करने वाला व्यक्ति बदले में कुछ भी नहीं लेता । इस प्रकार दान एक उपकार की भावना है।

किंतु जैसे कपूर को छूने से आपके हाथ स्वयं ही सुगंधित और कीटाणु रहित हो जाते हैं, वैसे ही दान करने से आपकी आत्मा शुद्ध और पवित्र हो जाती है। और ईश्वर के सन्निकट आ जाती है ।

जब आपकी आत्मा ईश्वर के निकट आती है तो आप ऐश्वर्य शाली हो जाते हैं। सभी सुखों से युक्त होते हैं । दान (daan) की बहुत महिमा बताई गई है।

सामान्य दान से बढ़कर कुछ विशेष दान होते हैं जिनमें पुराण (purandaan) ग्रंथों का दान सम्मिलित होता है ।

आज हम आपको बताएंगे How to donate puran ; पुराण दान (purandaan) करने की विधि और उसका महत्व।

नारद पुराण में 18 पुराण बताए गए हैं । पूर्व में आपने 12 पुराणों के बारे में अगले 2 अंकों में जानकारी प्राप्त की। आप

अब शेष 6 अंकों के पुराणों के दान के संबंध में यह जानकारी प्रस्तुत की जा रही है। पुराण का दान न केवल इस लोक को सुधारना है । बल्कि यह आपके परलोक को भी सुधारता है। और पीढ़ियों तक इसका असर बना रहता।

18 पुराणों के नाम और उन्हें दान करने का मास

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पुराण का नामदान करने का मास
1. ब्रह्म पुराणवैशाख मास की पूर्णिमा
2. पद्म पुराणजेष्ठ मास की पूर्णिमा
3.विष्णु पुराणआषाढ़ मास की पूर्णिमा
4.वायु पुराण श्रावण मास की पूर्णिमा
5.श्रीमद् भागवत पुराणभाद्रपद मास की पूर्णिमा
6.नारद पुराणअश्विन मास की पूर्णिमा
7.मारकंडेय पुराणकार्तिक मास की पूर्णिमा
8.अग्नि पुराणमार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा
9.भविष्य पुराण पौष मास की पूर्णिमा
10.ब्रह्मवैवर्त पुराणमाघ मास की पूर्णिमा
11.लिंग पुराणफाल्गुन मास की पूर्णिमा
12.वाराह पुराणचैत्र मास की पूर्णिमा
13.स्कंद पुराणमाघ या चैत्र मास की पूर्णिमा
14.वामन पुराणशरद पूर्णिमा विषुव संक्रांति
15.कूर्म पुराणअयनारम्भ के दिन
16.मत्स्य पुराणविषुवयोग, जब दिन और रात समान हो
17.गरुड़ पुराणचैत्र मास की पूर्णिमा
18.ब्रह्मांड पुराणवैशाख पूर्णिमा विषुवयोग
पुराणों के नाम और उनके दान करने का मास

अभी तक हमने 12 पुराणों के दान करने की विधि और फल के बारे में जानकारी प्राप्त की। वे पुराण थे ब्रह्मपुराण, पद्म पुराण, विष्णुपुराण, वायुपुराण, श्रीमद्भगवत पुराण, नारद पुराण, मार्कंडेयपुराण, अग्निपुराण, भविष्यपुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, लिंगपुराण और वाराह पुराण।

आज हम शेष बचे हुए 6 पुराणों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे वह पुरान (puran) इस प्रकार हैं स्कंद पुराण (skand puran), वामन पुराण (vaman puran), कूर्म पुराण (kurm puran), मत्स्य पुराण(matsya puran ), गरुड़ पुराण (garud puran) और ब्रह्मांड पुराण (bramhand puran)।

स्कंद पुराण (skand purandaan) के दान करने की विधि

  • स्कंद पुराण ( skand puran) में सर्वाधिक श्लोक 81 हजार है।
  • इसे लिखकर सुवर्ण मय त्रिशूल के साथ दान किया जाता है।
  • इसका दान बड़े आदर व पूजन करके करना चाहिए।
  • यह दान किसी शिवभक्त ब्राह्मण को करना चाहिए

स्कंद पुराण (skand purandaan) के दान करने का फल

  • स्कंद पुराण (skand purandaan) के दान का बहुत महत्व बताया गया है।
  • यह माघ या चैत्र मास की पूर्णिमा को किया जाता है।
  • इसे दान करने से दान दाता को भगवान शिव के लोक में स्थान प्राप्त होता है ।
  • और वह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करता है तथा सभी सुख और आनंद का उपभोग करता है।
  • स्कंद पुराण के पढ़ने या उसकी विषय सूची के पढ़ने और सुनने मात्र से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

वामन पुराण (vaman purandaan) के दान करने की विधि

  • वामन पुराण (vaman puran) में 10000 श्लोक हैं ।
  • इसका दान शरद पूर्णिमा या विषुव संक्रांति में किया जाता है ।
  • वामन पुराण को लिख कर , घृत धेनु के साथ दान किया जाता है।
  • यह दान किसी वेद के जानने वाले वेदवेत्ता ब्राह्मण को करना चाहिए

वामन पुराण ( vaman purandaan) के दान करने का फल

  • वामन पुराण के दान दाता को दान करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है।
  • दाता के पितरों को स्वर्ग तथा दाता को स्वयं भगवान विष्णु के परम पद की प्राप्ति होती है।
  • वामन पुराण (vaman puran) के पढ़ने एवं विषय सूची के पढ़ने और सुनने मात्र से पाठक एवं श्रवण कर्ता दोनों को संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है

कूर्म पुराण ( kurm purandaan) के दान करने की विधि

  • कूर्म पुराण (kurm puran) में 17000 श्लोक हैं।
  • इसे अयन आरंभ के दिन दान करना चाहिए।
  • कूर्म पुराण के दान को लिखकर, सोने की कच्छप ( कछुए) की प्रतिमा के साथ दान करना चाहिए। य
  • इसे किसी योग्य,उत्तम और सदाचारी ब्राह्मण को दान (purandaan) करना चाहिए।

कूर्म पुराण (kurm purandaan) के दान करने का फल

  • कूर्म पुराण के दान करने से दानदाता को धर्म अर्थ काम और मोक्ष सभी चारों फलों की प्राप्ति होती है।
  • इस पुराण के पढ़ने या विषय सूची के पढ़ने या सुनने से दानदाता इच्छा अनुसार लोकों को भोग कर विष्णु लोक का वासी होता है।
  • कूर्म पुराण के सुनने और पढ़ने का बहुत महत्व बताया गया है

मत्स्य पुराण (matsya purandaan) की दान करने की विधि

  • मत्स्य पुराण में 14000 श्लोक हैं।
  • इसका दान विषुवयोग , जब दिन और रात समान हो, में किया जाता है।
  • मत्स्य पुराण को लिखकर, सुवर्ण के मत्स्य और गाय के साथ दान किया जाता है।
  • यह किसी जितेंद्रिय, उत्तम और ब्रह्म ज्ञानी, वेदाभ्यासी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

मत्स्य पुराण ( matsya purandaan) के दान करने का फल

  • मत्स्य पुराण दान (purandaan) करने वाले दानदाताओं को भगवान विष्णु के परम धाम की प्राप्ति होती है।
  • पुराण एवं विषय सूची के पढ़ने या सुनने मात्र से व्यक्ति आयुष्मान और पुत्र वान होता है।
  • तथा समस्त धन ऐश्वर्य से पूर्ण होता है।

गरुड़ पुराण (garud puran) के दान (daan) करने की विधि

  • गरुड़ पुराण में 19000 श्लोक है ।
  • यह चैत्र मास की पूर्णिमा को दान किया जाता है।
  • गरुण पुराण को लिखकर दो स्वर्णमय हंस की प्रतिमा के साथ दान करना चाहिए।
  • इसे हमेशा किसी योग्य, कुलीन और कुटुंबी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

गरुण पुराण (garud puran) के दान करने का फल

  • गरुण पुराण को दान करने से दानदाता को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।
  • इसे पढ़ने व इसकी विषय सूची को पढ़ने या सुनने मात्र से भोग एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मांड पुराण (brahmaand puran) के दान (daan) करने की विधि

  • ब्रह्मांड पुराण में 12000 श्लोक हैं।
  • यह वैशाख पूर्णिमा या विषुवयोग में दान किया जाता है ।
  • इसे लिखकर, सोने के सिंहासन पर रखकर, वस्त्र से आच्छादित करके
  • और पूजन आदि के साथ दान करना चाहिए।

ब्रह्मांड पुराण (brahmaand puran) के दान (daan) करने का फल

  • इसे दान करने वाले दानदाता को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है।
  • ब्रह्मांड पुराण एवं विषय सूची के पढ़ने या सुनने मात्र से संपूर्ण पुराण के पढ़ने एवं सुनने का फल प्राप्त होता है

आपसे निवेदन

इस प्रकार पूर्व के तीन चार अंकों में हमने पुराण दान से संबंधित सभी जानकारी प्रस्तुत की है। आशा है आपको यह लेख How to donate Puran से संबंधित जानकारी अच्छी लगी होगी।

इसे अपने इष्ट मित्रों और परिवार जनों को अवश्य प्रेषित करें, ताकि वे सभी इसका लाभ उठा सकें ।अपना कीमती समय निकालकर हमारा यह लेख पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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