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Parenting Tips for Teenagers

Parenting Tips for Teenagers में एक कहानी के माध्यम से बताना चाहूंगी। 

आज रंजना मिली थी, बहुत ही खिन्न थी। मैंने रंजना के पास जाकर उससे पूछा ;

उसने बताया- क्या कहूं दीदी,मुझे तो समझ ही नही आ रहा कि कैसे बने good parents !

मेरे दो बच्चे हैं, दोनों ही बिल्कुल भी कहना नहीं सुनते अपनी मनमानी करते रहते हैं। पूरा दिन मोबाइल खेलते हैं।
ना जाने कौन सी परवरिश में कमी रह गई! मैंने तो हर समय बच्चों के मन का ही किया ।
लेकिन फिर भी बच्चे अलग से व्यवहार करने लगे हैं। ऐसा कहते कहते उसकी आंखों से आंसू की दो बूंदे टपक गई।
सचमुच माता-पिता का जीवन एक बलिदान का जीवन होता है ।मैने उसे सांत्वना दी और समझाया कि;
अच्छा अभिभावक तो वही होता है जो अपने बच्चों को हमेशा अपने से अभिभूत रखें।

संस्कार क्या हैं? इनका निर्माण कैसे करें? कौन से संस्कार निर्मित करें?

अच्छे अभिभावक में 7 गुणों का होना आवश्यक है ।

1.बच्चो को संरक्षण देना! Protection of children!

संरक्षण देना अर्थात प्रोटेक्शन। parents  को Teenagers को कलयुगी प्रभाव से संरक्षित करना आना चाहिए ।
कलयुगी प्रभाव से तात्पर्य है सोशल मीडिया से बच्चों को दूर रखने का प्रयास करना चाहिए ।
और आजकल parents स्वयं सोशल मीडिया में इंटरेस्टेड रहते हैं।
बच्चे भी दिनभर माता-पिता की नकल करते हुए मोबाइल का संचालन करते रहते हैं ।
मोबाइल में गेम खेलते हुए मात्र उंगलियां चलाने से हार जीत सफलता असफलता उनके कदम चूमने लगती है ,
तो वह हर चीज को बहुत आसान समझ लेते हैं,फिर आम जिंदगी में वैसा नही होता तो क्रोधित हो उठते हैं।
और अपना गुस्साअपने सबसे नजदीकी व्यक्ति मां तथा परिवार के अन्य सदस्यों पर निकालते हैं।

2. बच्चों को संगति देना! Give children companionship!

बच्चों के लिए काम करना और companionship में बहुत फर्क होता है।
जैसे हारमोनियम के साथ तबले की संगति होती है।अर्थात दोनों वाद्य एक सुर में बजने चाहिए।
जब हारमोनियम बजता है , उसी लय में तबला बजाया जाता है तो उसको तबले की संगत कहते हैं ।
बच्चा जिस लय में चले या जो वह चाहता है वैसा parents करें यह संगति कहलाती है ।
बच्चा आपसे बात करना चाहता है। आपके साथ खेलना चाहता है। आपका अपने प्रति समर्पण चाहता है।
आपकी व्यस्तता के कारण यदि वह अकेला महसूस करेगा तो घर के बाहर या अन्य तरह की संगति खोजेगा,
ऐसी संगति उसके जीवन को नष्ट कर देगी।अतः अच्छे parents को बच्चे को संगतिं देना आना चाहिए।

3. बच्चों को सम्मान करना सिखाना! Teach children to respect them!

Teenagers को सबका respect करना सिखाना चाहिए। इसके लिए पहले उसका respect स्वयं करें।
इसके अलावा आपके आचरणों को देखकर भी children सीखते हैं।
जब आप मंदिर के सामने से निकलते हैं तो मंदिर के सामने सर झुकाते हैं ।
तो बच्चे को कुछ सिखाना नहीं पड़ता। वह भी वहां पर सिर झुका के ही आगे बढ़ेगा।
परिवार के सदस्यों का भी आपस मे जो सम्मानजनक रवैया होता है उसको देख कर भी बच्चे सीखते हैं।
यदि मां , पिता के बारे में कहे कि बेटा पापा आपसे बड़े हैं उनका सम्मान करना चाहिए। आपको प्यार करते हैं ।
तो Teenagers  यह बात सीखेंगे कि उन्हें पिता का सम्मान करना चाहिए ।
वैसे ही पिता यह बताएं कि माँ तुम्हारे लिए दिन रात काम करती हैं भोजन बनाती है तुम्हारी देखरेख करती है।
उनका तुमको respect करना चाहिए तो बच्चा यह चीज सीखेगा कि मुझे मां की respect करना चाहिए।

4. बच्चों की कभी दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए! Children should never be compared to others!

बच्चों की compare कभी किसी से नहीं करनी चाहिए ।
बच्चों पर कभी भी क्रोध नहीं करना चाहिए आप उनको गुस्सा दिखाएं पर अंदर से उनसे गुस्सा ना रहे ।
किसी भी तरह की मारपीट और अपमानजनक व्यवहार बच्चों के साथ कभी नहीं करना चाहिए।
जैसे गुलाब के पौधे की माली देखरेख करता है। और उसमें खूब सुंदर फूल निकल कर आते हैं।
मनी प्लांट के पौधे की भी देख रेख करता है,किंतु उस में फूल नहीं निकलते पर उसके पत्ते जरूर बहुत बड़े होते हैं।
इतने बड़े इतने सुंदर कि लोग उसको भी उतना ही ज्यादा पसंद करते हैं जितना गुलाब के पौधे को पसंद करते हैं।
कहने का मतलब है कि हर व्यक्ति के अंदर अलग अलग व्यक्तित्व होता है
और उसकी खूबियां भी अलग-अलग होती है और हर व्यक्ति यूनिक होता है।
गीता में बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश है और प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है ।
इसीलिए हर एक में एक अद्वितीय लक्षण ईश्वर की तरफ से उसको प्राप्त होता है ।
उस लक्षण को पहचान कर parents को उस दिशा में अपने बच्चे को प्रेरित करना चाहिए ।
मनी प्लांट को गुलाब की तरह और गुलाब को मनी प्लांट की तरह सिंचित करने से दोनों ही ग्रोथ नहीं कर पाएंगे ।
बच्चों के अपने गुणों को विकसित करना चाहिए। किसी की भी compare किसी दूसरे बच्चे से कभी न करें।
अन्यथा Teenagers की ग्रोथ प्रभावित होती है उनका विकास रुक जाता है।

5.अभिभावकों में सहनशक्ति होनी चाहिए ! Parents must have stamina!

बच्चे के साथ बहुत सहन करते हुए व्यवहार करना चाहिए क्योंकि वह तो अभी इस दुनिया मे आए हैं ।
उन्होंने तो कुछ देखा नहीं है वह वही देख रहे हैं जो आप उन्हें दिखाना चाहते हैं ।
आपको धैर्य के साथ तब तक प्रयास करना चाहिए जब तक बच्चा वह ना देखने लगे जो आप दिखाना चाहते हो।
एक बार किसी प्रश्न का उत्तर ना बनने पर हम झल्ला जाते हैं। बच्चों पर क्रोध प्रकट करने लगते हैं ।
उनके साथ मारपीट करने लगते हैं ।दुर्व्यवहार करने लगते हैं। बुरा भला कहने लगते हैं।
और यह भी नहीं समझ पाते कि बच्चा उस बात को समझ नहीं पा रहा कि आपको गुस्सा क्यों आ रहा है।
क्योंकि वह तो अपनी जिज्ञासा पूर्ण करना चाह रहा है। वह आपसे कुछ जानना चाह रहा है।
वह आपसे कुछ सीखना चाह रहा है लेकिन आप इतने व्यस्त हैं,
इतना टेंस है कि आपको उसका प्रश्न उसकी सीखने की जिज्ञासा ही बुरी लग रही है।
और यदि वह उससे संतुष्ट न होकर पुनः प्रश्न करता है तो आप क्रोधित हो उठते हैं ।
ऐसे में बच्चा आपसे प्रश्न करना बंद कर देता है और फिर उसके प्रश्न दूसरा रूप ले लेते हैं ।
दूसरी ओर मुड़ जाते हैं और गलत तरीके से उत्तर प्राप्त करके गलत दिशा को चल पड़ते हैं।
अतः Teenagers को समझने व सहन करने का stamina होना बहुत आवश्यक है।


6. अभिभावक को अच्छा कहानीकार होना चाहिए!
Parent should be a good storyteller!

एक बड़ी ही रोचक बात यह है कि parents को कम से कम 200- 500 कहानियां तो आनी ही चाहिए।
कहानियां सुनना बहुत ही रोचक लगता है। बच्चे क्या बड़े-बड़े भी कहानी सुनने के लिए खड़े हो जाते हैं।
अब आगे क्या होगा यह जिज्ञासा ही सीखने में मदद करती है।
कहानियां जो हमारे सदग्रंथों में महाभारत ,श्रीमद् भागवत गीता, भागवत पुराण ,श्रीरामचरितमानस इत्यादि में हैं।
इतने प्रेरणादाई कथानक हैं। जिनके जरिए हम Teenagers को अच्छी शिक्षा-संस्कृति व परम्परा का भी ज्ञान करा देते हैं।
इसके अलावा महापुरुषों के जीवन चरित्र को लेकर उनके प्रसंगों से भी बच्चों को प्रेरित किया जा सकता है।
इस प्रकार अच्छी-अच्छी कहानियां सुनाकर हम बच्चों को शिक्षा दे सकते हैं।
इन कहानियों का इतना होता है कि बच्चे उस कहानियों से प्रेरणा लेकर और अपने मार्ग में आगे बढ़ते जाते हैं।
यह कहानियां उनका मार्ग प्रशस्त करती हैं,उन्हें अच्छा-बुरा समझाती है और मित्र की तरह उनके साथ चलती है ।
इसीलिए बचपन से ही बच्चों को parents द्वारा अच्छी अच्छी कहानियां सुनाकर प्रेरित करना चाहिए ।
इसीलिए parents को अच्छा  storyteller होना चाहिए।

7. बच्चों को आध्यात्मिकता जरूर सिखानी चाहिए! Children must be taught spirituality!

बच्चों को spirituality भी सिखानी चाहिए । पहले घरों में सुबह शाम आरती- पूजन का विधान हुआ करता था ।
लेकिन आजकल बहुत से लोग इसे outdated मानते हैं। और पूजा पाठ करते हुए बच्चों को देखकर हंसते भी हैं।
Spirituality कोई अंधानुकरण नहीं है। यह ऐसा वरदहस्त है जो कठिनाई में हमारे मनोबल को बढ़ाता है।
जिस का मनोबल बढ़ा हुआ होता है वह व्यक्ति हर विपत्ति में भी संभल जाता है । हर कार्य में जीत हासिल करता है।
सचमुच Teenagers के लिए हम बहुत चिंतित होते हैं पर कभी यह नहीं सोचा कि हमारे अंदर कौन सी कमी है।
तब वैसे ही बच्चों की parenting को लेकर के हम बच्चों को दोष क्यों देते हैं।
हम स्वयं को शिक्षित करके वैसा माहौल पैदा करके बच्चों के life को easy बना सकते हैं ।
किंतु जहां पर माता-पिता स्वयं अपनी ही प्रगति में लगे हों वहां बच्चों को संस्कारित करना मुश्किल होता है ।
कलयुग के प्रभाव से Teenagers को हम दूर तो नहीं कर सकते। किंतु उन्हे सक्षम जरूर बना सकते हैं।
ताकि बच्चे कलयुग में अपने आप को अच्छा जीवन जीने के लिए तैयार कर सकें।
आज के परिवेश में यह बातें बड़ी ही बहुमूल्य से प्रतीत होती हैं । अतः अवश्य पढ़ें -👇👇

बच्चों में निर्मित करें सदाचरण

बच्चों को न बनाएं बोनसाई वृक्ष !!
यह बातें एक अच्छा parents बनने में हमें मददगार भी हो सकती हैं।
यह सब सुनकर रंजना के चेहरे से tension दूर हुआ । अब वह अपने बच्चों की परेशानी व जरूरतें समझ चुकी थी।
व नये संकल्प की मुस्कान चेहरे पर निखर आई थी। बड़े उत्साह के साथ वह अपने घर की ओर चल पड़ी।

आज रंजना बातों-बातों में parenting tips of Teenagers जान गई थी।

आशा है आपको यह article पसन्द आया होगा। यदि अच्छा लगे तो अपने दोस्तो को भी शेयर करें।

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http://Indiantreasure.in

HG Amogh lila prbhu art of parenting👇👇

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