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Karava chauth vrat vidhi

Karava chauth vrat vidhi

Karava chauth vrat vidhi कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है ।

इसे करक चतुर्थी या गणेश चतुर्थी भी कहते हैं।यूँ तो यह सुहाग की पूजा है ।

अतः प्रत्येक क्षेत्र में थोड़ी भिन्नता के साथ मूल पूजा होती है।

किन्तु जानकारी व पूजा पद्धति के अनुसार मैंने यह जानकारी लेखबद्ध करने का प्रयास किया है।

जो निश्चित ही आप के लिए रोचक, व लाभकारी होगी।व पूजा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी।

यह निर्जला व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना के लिए करती हैं।

जो सूर्योदय से प्रारंभ होकर रात्रि चंद्रोदय पर चन्द्र को अर्घ्य देने के पश्चात समाप्त होता है।

विवाह के पहले करवाचौथ के व्रत में लड़की के मायके से लड़की व सासुजी के लिए करवा व वस्त्र दिए जाते हैं।

इस लेख में आप पाएंगे-

  • करवाचौथ व्रत कब है।
  • चंद्रोदय का समय क्या है।
  • किसकी पूजा करें।
  • कौन सी पूजन सामग्री उपयोग करें।
  • कैसे करें पूजन की तैयारी।
  • क्या है पूजनविधि।
  • करवा चौथ की चार कथाएं।
  • श्रीगणेश जी की आरती।

करवाचौथ व्रत कब है। when is karava chauth vrat

चंद्रोदय का समय क्या है|What is the moonrise time?

लाला रामस्वरूप पंचांग के मुताबिक चंद्रोदय पर रात्रि के होगा ।

चंद्रोदय के 1 घंटा पूर्व पूजा प्रारम्भ की जाना चाहिए ।उसके बाद चन्द्रदर्शन कर अर्घ्य दें।

किसकी पूजा करें!|Whom to worship

Karava chauth vrat के दिन शिव परिवार की पूजा करते हैं।

अर्थात शिव-पार्वती, भालचन्द्र गणेश, कार्तिकेय, नंदी आदि देवताओं की पूजा की जाती है।

और सुहाग की वस्तुओं की पूजा तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है।

पूजा हेतु बाजार में करवा के चित्र भी आते हैं। जिसमें विधिवत समस्त चित्र बने रहते हैं ।

कहीं-कहीं दीवाल पर पीले चावल से एपन बनाकर karava chauth का चित्र बनाया जाता है ।

जिसमें चंद्रमा ,शिव तथा कार्तिकेय आदि के चित्र बनाकर उनकी पूजा की जाती है।

 

कौन सी पूजन सामग्री का उपयोग करें|Worship material.

  1. करवा चौथ का चार्ट ।
  2. मिट्टी के करवा ढ़क्कन सहित ,एक करवा टोंटी वाला जिससे चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है ।दूसरा लोटे की तरह ।
  3. करवा की सींक (7)
  4. प्रसाद में फरा, कढ़ी, पुआ, पंजीरी, लड्डू, पूरी, चावल, सब्जी , समस्त भोजन ।
  5. कलश, हल्दी ,कुमकुम अक्षत ,दूब, पान के पत्ते लौंग,इलायची ,पुष्प, घी की बत्ती ,आरती,माचिस।
  6. सुहाग की समस्त सामग्री चूड़ी बिंदी महावर सिंदूर आदि ।
  7. करवा की थाली, लोटा, छलनी आदि।(karava chauth vrat 2020)

पूजन की तैयारी कैसे करें!|How to prepare for worship

पूजन की समस्त सामग्री vrat के 1 दिन पूर्व ही घर पर लाकर रख ले ।

Karava chauth vrat के दिन प्रातः काल सूर्योदय के पूर्व गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।

समस्त सुहाग चिन्हों को धारण कर धुले स्वच्छ वस्त्र पहन कर prepare हो।

आज के दिन लाल पीले और हरे रंग के ही वस्त्र पहने चाहिए ।

काले सफेद या धूसर रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए।

 क्या है पूजनविधि poojanvidhi

Karava chauth vrat की poojan vidhi इस प्रकार है। समस्त पूजन सामग्री पर गंगाजल छिड़कें।

जिस स्थान पर करवा माता की पूजा करनी है वहां कुछ अक्षत रखें। अक्षत के ऊपर पटा रखें।

पटे के ऊपर लाल कपड़ा बिछाए। पटे पर करवा माता का चित्र रखें। उस चित्र का poojan करें।

इसके पश्चात हाथों में जल व पुष्प लेकर करवा माता के समक्ष vrat का संकल्प लें।

संकल्प इस प्रकार ले;

” हे माता मैं अपने पति की good health व long life की कामना करती हूं।

आपकी प्रसन्नता हेतु  

कृष्णपक्ष चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि karava chauth vrat का संकल्प लेती हूं। जिसे आप स्वीकार करें।”

किसी भी vrat को करने से पूर्व देवी देवता के समक्ष उस pooja का संकल्प जरूर लेना चाहिए।

संकल्प लेने के पश्चात ही vrat प्रारंभ होता है।

करवा की थाली तैयार करें-

अब मिट्टी के karava को सजा कर तैयार कर ले। आजकल सजे हुए करवा भी मिलते हैं ।

करवा की थाली ,छलनी व गिलास को भी सुंदर तरीके से सजा लें ।

आजकल karava ki thali का भी सेट सजा सजाया मिलता है।

पूजा की समस्त सामग्री पूजा स्थल पर एकत्र कर लें। इतना सब कार्य सुबह ही कर लें ।

प्रसाद तैयार करें-

अब प्रसाद तैयार करें। प्रसाद में गेहूं के आटे की पंजीरी पुआ फरा आदि तैयार कर लें। 

भोग की थाली तैयार कर ले। यह त्यौहार सुहाग का त्यौहार है व सुहागिनो द्वारा किया जाता है ।

सुहाग सामग्री रखें

पूजन में विशेष रुप से सुहाग की समस्त सामग्री रखें। स्वयं  समस्त सुहाग चिन्हों को पहने।

 नए वस्त्र पहने। से सुहाग की कामना करते हुए यह व्रत करना चाहिए।

पूजन विधि poojanvidhi

चंद्रोदय के 1 घंटा पूर्व पूजा प्रारंभ कर दें। करवा माता के  समक्ष अक्षत का आसन बनाकर करवा रखें ।

टोटी वाले करवा में गंगा जल मिश्रित जल रखें। जल वाले करवा में करवा की सातों सीके रखें।

उस पर करवा का ढक्कन रखें। ढक्कन पर अक्षत व दीपक जलाकर रखें ।

दूसरे karava के अंदर चार पूड़ी, चार फरा, चार लड्डू आदि रखें ।

ऊपर से ढक्कन रखकर ढक्कन में चार पुआ व पंजीरी रखें।

कलश तैयार करें-

इसके बाद ज्योति कलश तैयार करें। ज्योति कलश तैयार करने के लिए थोड़ी से अक्षत रखें।

उसके ऊपर कलश का लोटा रखें । जिसमें गंगाजल मिश्रित जल डालें।

सुपारी हल्दी लोंग इलाइची इत्र सिक्का आदि डालकर, पंचपल्लव आम के रखें।

कलश में पांच बार मौली लपेट कर 3 गठान लगा कर बांध दें।

उसके ऊपर एक प्लेट रखकर दीया जलाकर रखें।

गणेश गौरी की स्थापना करें।

सर्वप्रथम गणेश गौरी की पूजा करें । फिर कलश की पूजा करें ।

समस्त पूजा पंचोपचार अर्थात स्नान, तिलक, धूप, दीप, गंध, पुष्पमाला ,आरती व नैवेद्य (भोग) करें ।

 करवा माता, शिव -पार्वती, कार्तिकेय ,गणेश ,चंद्रमा आदि की पूजा करें ।

 पंचोपचार या षोडशोपचार जैसी पूजा आप करना चाहे कर सकते हैं। भाव प्रधान होते हैं।

अतः श्रद्धा के साथ ईश्वर की प्रसन्नता के लिए pooja करनी चाहिए।

इस समय मन में असीम शांति और प्रसन्नता होनी चाहिए।

 करवा माता को समस्त सुहाग की सामग्री अर्पित करें। सुहाग की सामग्रियों की पूजा करें। अब आरती करें।

 

गणेश जी की आरती |Aarti of Ganesh ji.

भलचन्र्द गणेश जी की जय

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।

लड्डू के भोग लगे संत करें सेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी ।

मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

अंधन को आंख देत कोढीन को काया ।

बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

रिद्धि सिद्धि दोउ नारि चंवर डुले बारी-बारी।

मूषक वाहन सवार संतन हितकारी।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा ।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।


दीनन की लाज राखो, शंभू सुतवारी।

कामना को पूरी करो जग बलिहारी ।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

चतुर्थी तिथि के अधिष्ठाता देवता श्री गणेश है । व चतुर्थी तिथि गणेश जी की अतिप्रिय है।

आरती के पश्चात karava chauth vrat की कथाएं सुने।

करवा चौथ की चार कथाएं हैं।|There are four stories of Karva Chauth.

पहली कथा इस प्रकार है

  • एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर चले गए।
  • इधर पांडवों पर अनेक विपत्तियां पहले से व्याप्त थी।
  • इससे द्रोपदी ने दुखी होकर कृष्ण का ध्यान किया ।और कष्टों के निवारण हेतु उपाय पूछा।
  • तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी को बताया । हे द्रोपदी एक समय पार्वती ने शिवजी से प्रश्न किया था।
  • तो उन्होंने सभी विघ्नों के नाशक इस karava chauth vrat को ही बताया था ।
  • अतः हे पांचाली! प्राचीन काल में धर्म परायण एक ब्राह्मण रहता था ।
  • उसके चार पुत्र तथा एक गुणवती सुशीला पुत्री थी।पुत्री ने विवाहिता होने पर करक चतुर्थी का व्रत किया।
  • किंतु चंद्रोदय से पूर्व ही उसे भूख ने वाध्य कर दिया ।
  •  उसके दयालु भाइयों ने छल से पीपल की आड़ में कृत्रिम चंद्र बनाकर दिखा दिया।
  • कन्या ने अर्ध्य दे भोजन किया। भोजन करते ही उसका पति मर गया।

व्रत महात्म्य

  • इससे उसने दुखी होकर अन्न्न जल छोड़ दिया।संयोग से उसी रात्रि में इंद्राणी धरती पर विचरण करने आइं।
  • ब्राह्मण कन्या ने इंद्राणी से अपने दुख का कारण पूछा। इंद्राणी बोली;  करवा चौथ व्रत में चंद्र दर्शन के पूर्व भोजन किया।
  • इसी से यह कष्ट मिला है।तब ब्राम्हण कन्या ने इंद्राणी से विनय पूर्वक प्रार्थना की।
  • और इससे मुक्ति का उपाय पूछा ।तब इंद्राणी बोली यदि तुम पुनः विधिवत karava chauth vrat करो।
  • तो निश्चय ही तुम्हारे पति पुनर्जीवित हो जाएंगे। उसने वर्ष भर प्रत्येक चतुर्थी का व्रत किया ।
  • तथा पति को प्राप्त किया। श्रीकृष्ण ने कहा कि द्रोपदी इस vrat से तुम्हारे सभी संकट टल जाएंगे।
  • इस प्रकार द्रौपदी ने karava chauth vrat  किया। और पांडव विजई हुए।
  • सौभाग्य पुत्र-पौत्र धन-धान्य हेतु यह vrat विधि पूर्वक करना चाहिए।

दूसरी कथा गणेश जी की

  • एक गांव में एक अंधी बुढ़िया रहती थी उसके एक लड़का व बहु थे।वह बहुत गरीब थी।
  • तथा हमेशा गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेशजी ने प्रसन्न होकर उसे वर देना चाहा।
  • और कहा कि तू कुछ मांग ले । तो बुढ़िया ने कहा कि मुझे तो कुछ मांगना नहीं आता।
  • कैसे और क्या मांगू। तब गणेश जी ने कहा कि तुम अपने बेटा बहू से पूछ कर मांग लेना।
  • तब बुढ़िया अपने घर आई । और अपने बेटे से पूछा कि मैं गणेश जी से क्या मांगू।
  • तो बेटा ने कहा धन मांग लो। फिर बुढ़िया ने बहु से पूछा तो बहू ने कहा नाती मांग लो।
  • तो बुढ़िया ने सोचा कि कुछ पड़ोसियों से भी पूछ लूँ। पड़ोसियों ने कहा कि तू तो थोड़े दिन जिएगी ।
  • तू धन लेकर क्या करेगी। और नाती को क्यों मांगे।तू तो आंख मांग ले।
  • जिससे तेरी जिंदगी आराम से कट जाए।अब बुढ़िया सोच में पड़ गई ।
  • वह ऐसा क्या मांगे । जिससे बेटा बहू की भी इच्छा पूरी हो जाए ।
  • और उसका जीवन भी सुखी हो जाए। रात भर बुढ़िया सोचती रही।दूसरे दिन गणेश जी आए।

गणेशजी द्वारा वरदान

  • और बोले कि अब जो चाहे सो मांग लो।तब बुढ़िया बोली; यदि आप प्रसन्न हैं तो मुझे यह वरदान दें!
  •  मैं अपनी आंखों से अपने नाती को चांदी के चम्मच से खीर खाते हुए देखूं।
  • यह सुनकर गणेश जी बोले की बुढ़िया मां तूने तो हमें ठग लिया। 
  • तूने अपनी आंखों के साथ साथ नाती और धन दौलत सभी मांग ली ।
  • अब तुम्हें वह सब कुछ मिलेगा जो तुमने मांगा है। यह कहकर गणेश जी अंतर्धान हो गए।
  • बुढ़िया मां को उसके मांगे अनुसार सब कुछ मिल गया।
  • Karava chauth vrat सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है।
  • धन-धान्य पुत्र पौत्रादि को देने वाला है। जिसे करने वाला हमेशा सुखी व संपन्न रहता है।

तीसरी कथा इस प्रकार है।

  • सात भाइयों की एक बहन थी। जो सभी भाइयों की दुलारी थी।
  • हमेशा भाइयों के साथ ही भोजन करती । पहले बहन खाना खाती । तब भाई खाना खाते थे।
  • बहन का विवाह होने के पश्चात वह अपने ससुराल गई। वहां पर करवा चौथ का दिन पड़ा।
  • करवा चौथ में भाई बहन के लिए karava लेकर पहुंचे। उन्होंने देखा की बहन भूखी प्यासी बैठी है।
  • अन्न का एक दाना भी नहीं खाने से उसका चेहरा मुरझा गया था।
  • जिसे देखकर भाइयों को बहुत दया आई। उन्होंने वृक्षों की आड़ में चलनी में दीपक जलाकर रख दिया।
  • और बहन को बताया कि चांद निकल आया है। जिसे देखकर बहन ने जल्दी से पूजन की।
  • और चंद्रमा को अर्घ्य देकर स्वयं भोजन करने लगी।

व्रत का प्रभाव

  • जैसे ही बहन ने पहला कौर खाया वैसे ही उसके पति के मृत्यु का समाचार आया।
  • जिसे सुनकर वह बहुत दुखी हुई। और अपनी भाभी को बताया।
  •  भाभी ने कहा- तुमने करवा चौथ के दिन बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए भोजन किया।
  • जिस कारण तुम्हारे साथ यह दुर्घटना घटी है। भाइयों ने भी बहन से क्षमा मांगी।
  •  बहन ने निश्चय किया कि मैं अपने पति को वापस जीवित करूंगी । अन्न जल ग्रहण नही करूंगी।
  • वर्ष भर की चतुर्थी का व्रत रखते हुए पुनः करवा चौथ के दिन व्रत रखा।
  • और सभी सातों भाभी से करवा के सुहाग की मांग करने लगी।
  • तब एक ने बताया कि जिस भाई ने तुमको चांद दिखाया था। उसी की पत्नी तुम्हें सुहाग दान कर सकती हैं।
  • तब बहन ने उसी भाभी से करवा की भीख मांगी।जिसे सुनकर भाभी अत्यंत द्रवित हुई ।
  • और उन्होंने करवा का जल नंद के पति के मुख्य में डाला।जिससे नंद का पति जीवित होकर उठ बैठा।
  • इस प्रकार करवा से सुहाग प्राप्त कर बहन ने अपने पति को जीवनदान दिलाया।
  •  सुहाग की कामना करने वाली स्त्रियों को श्रद्धा के साथ karava chauth vrat  करना चाहिए।

चौथी कथा इस प्रकार है!

  • किसी गांव में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे ।इसमें ब्राह्मणी का नाम करवा था।
  • दोनों ही भगवान गणेश के बड़े भक्त थे। और दिन रात पूजा पाठ में रत रहते थे।
  • एक दिन ब्राम्हण नदी में स्नान करने गया। तो नदी में मगर ने उसके पैर को पकड़ लिया।
  • तब ब्राह्मण अपनी पत्नी का नाम करवा -करवा करके पुकारने लगा।
  • जिसे सुनकर करवा ने कच्चे सूत से मगर को बांध लिया।और यमराज से प्रार्थना की।
  • कि मेरे पति का जीवन दो और मगर को मृत्यु दो। यमराज ने कहा- मगर की मृत्यु का समय अभी नहीं आया है।
  • तो मैं उसे कैसे मृत्यु दे सकता हूं।जिसे सुनकर करवा  दुखी हो गई।

करवा का हठ

  • उसने कहा यदि मेरे पति को जीवनदान नहीं दिया, तो मेरे जीने का क्या उद्देश्य रहेगा।
  • अतः मै भी अपने प्राण त्याग दूंगी। जिसे सुनकर यमराज ने कहा कि ऐसा करना उचित नहीं है।
  • किंतु करवा ने एक भी बात नहीं मानी और यमराज से प्रार्थना करने लगी।
  • और अत्यंत दुखी होकर रोने लगी । करवा की प्रार्थना व रुदन सुनकर यमराज द्रवित हो गए।
  • और उन्होंने करवा के पति के प्राण वापस कर दिए।
  • इस प्रकार करवा माता ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांग लिए।
  • इसीलिए सभी सुहागिने अपने सुहाग की सलामती के लिए karava chauth vrat करती है।

 

इस प्रकार चारों कथाएं कहकर चंद्रमा के दर्शन कर ,जल अर्घ्य देकर चंद्रमा की पूजा करें।

अर्घ्य देने के लिए मांग के सामने से बालों की लट को निकाल कर ,करवा की सीख साथ में लें।

Karava से जल हाथ में डालते हुए कहा जाता है?


“”बारे चंदा अरघ देत, मानिक दियना बार
अरघ चंद्रमा का सुहाग सुहागिन का””

(सुहागिन के स्थान पर स्वयं का नाम लें)

Karava chauth vrat 


इस तरह 7 बार 7 सीको से चंद्रमा को अर्घ्य देकर, चंद्रमा की आरती उतारे।

समस्त भोजन सामग्री को अच्छे से मिलाकर एक दूसरी खाली थाली सामने रखें।

एक एक कौर चंद्रमा को दिखाते हुए उस खाली थाली में रख दें ।

इस प्रकार सात कौर चंद्रमा को भोजन कराएं। फिर  थाली में जल घुमाकर आचमन करें।

इसके बाद पति पत्नी मिलकर चंद्रमा को प्रणाम करें। पत्नी पति को तिलक लगाएं।

करवा के दीपक से आरती उतारे।व मंगलमय दांपत्य जीवन की चंद्रमा से कामना करें।

चंद्रमा मन का कारक है।

क्योंकि चंद्रमा मन का कारक होता है। और मन की प्रसन्नता व प्रेम चंद्रमा की प्रसन्नता से ही संभव होता है ।

इस प्रकार चंद्रमा से मन ही मन आशीर्वाद ले। पति पत्नी को जल पिलाकर व्रत का पारण कराए।

और करवा में रखा हुआ प्रसाद पति पत्नी मिलकर ग्रहण करें।

इसके अलावा अन्य karava भी पूजा में रखे जाते हैं, जो दान के होते हैं।प्रसाद वाला karava  अन्य सुहागिन स्त्रियों को दान करें ।

एवं स्वयं की सासू मां को वस्त्रों के साथ सुसज्जित करवा दान करें।और चरण स्पर्श करके आशीर्वाद प्राप्त करें।

इसी प्रकार करवा माता की चढ़ाई गई पूजा सामग्री में से स्वयं की सुहाग सामग्री स्वयं ले।

तथा दान हेतु अर्पित की गई सुहाग सामग्री को सुहागन स्त्रियों को दान कर दें।

इस प्रकार पूजन कर भोजन ग्रहण करें।आप सभी को करवाचौथ की शुभकामनाएं।

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ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए जरूर देखें👇👇👇

http://Indiantreasure.in

 

 
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10 thoughts on “Karava chauth vrat vidhi

  1. Liked the quick refrences and use of english. It will be helpful for those who do not understand Hindi well.
    Once again this blog is all you need while pooja preparation.
    Nice content.
    Keep going.❤️

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