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Kahani chida ka badala, kisan mari chirai …

Kahani chida ka badala, kisan mari chirai ham daanv len jaany. बदले के भावना से केवल सर्वनाश ही होता है। एक छोटा सा चिड़ा भी किस प्रकार अपनी संगिनी की मौत का बदला लेता है। लोकभाषा में बहुत सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। आइये श्रीमती मनोरमा दीक्षितजी द्वारा लिखित सुंदर व मर्मस्पर्शी Kahani chida ka badala !

Kahani chida ka badala,

kisan mari chirai ham daanv len jaany.

गंगा यमुना के मैदान में एक गांव था सूरजपुर।

वहाँ किसान मंगलू अपने छोटे से रकबे पर खेती कर अपना परिवार चलाता था।

उसकी पत्नी तिजिया खेती-बाड़ी के काम में अपने पति की पूरी मदद करती थी।

कुछ दिनों पहिले ही धान काटकर खलिहान में रखी गयी थी।

आज धूप देखकर तिजिया ने धान के बोझे फैला दिये थे, परन्तु यह क्या ?

कुछ ही देर में चिड़ा “मोधा” चिडिया “चींची” और उनके दोस्त, धानों की बालियो पर टूट पड़े।

सभी हंसते-खेलते ताजी नर्म धान से चावल निकालकर खा रहे थे।

यह देख किसान मंगलू झोपड़ी से गुलेल लेकर आ गया और नन्हें परिन्दों पर कंकड़ों से निशाना लगाने लगा।

यह देख बहुत पक्षी तो उड़कर पेड़ों में जा छुपे परन्तु भोली भाली चुनिया अपने सुनुआ के साथ

फुदक फुदक कर ताजी धान खाने में मगन थी। उसकी ढिठाई देख मंगलू को गुस्सा आ गया और

उसने नन्हीं चुनिया पर निशाना साधा। पल भर में ही चुनिया अपने दोनों पैर ऊपर उठाकर चित्त हो गयी।

उसकी यह हालत देख सुनुआ घबरा गया। अब चुनिया तड़प कर ठंड़ी हो चुकी थी

और उसका साथी अपनी प्यारी संगिनी चुनिया के चारों ओर चक्कर लगाकर आंसू बहा रहा था ।

Kahani chida ka badala

हताश सुनुआ अब चिड़ी की मौत का बदला लेने को तैयार हो गया।

अपने दोस्त मोधा और तेजा के साथ मिलकर एक सीकों की गाड़ी बना ली,

उसमें दो मूसा जोते गये और मृत चिड़ी को रख वह बदला लेने चल पड़ा।

रास्ते में उसे सर्प कालू मिला। गाड़ी में कुछ ढका हुआ देख कर सर्प कालू बोला- अरे चिड़ा भाई कहां जा रहे हो ?

सुनुआ ने आंसू बहाते हुए कहा

सीकन की गाड़ी दो मूस जुते जाय । किसान मारी चिरई हम दांव लेन जॉय।”

दुखी चिड़ा पर उसे बड़ी दया आई और वह भी चिड़ा का साथ देने चल पड़ा।

कुछ दूर चलने पर उसे बिच्छु”चरफरी” मिली। रोतेबिलखते चिड़ा को देख चरफरी बोली-

अरे चिड़ा भाई गाडी लेकर कहाँ जा रहे हो अकेले? चुनिया भाभी को कहाँ छोड़ दिये?

अब तो चिड़ा सुनुआ दहाड़ मारकर रोने लगा। कुछ शांत होने पर वह बोला-

सीकन की गाड़ी दो मूस जुते जॉय। किसान मारी चिरई हम दाव लेन जाँय।”

उसकी हालत देख बहन “चरफरी भी उसके साथ हो गयी। अभी वे कुछ दूर गये ही थे कि

पास में बहती नदी को देख सभी ठंडा पानी पीने लगे। तभी “कांव काव” की आवाज से

चिड़ा का दुःख पूछता पहाडी कौआ सूरमा’ भी आ पहुंचा और चिड़ा की हालत पर उसे दया आ गयी

तथा यह भी साथ हो लिया।

वे धीरे धीरे…

वे धीरे-धीरे किसान मंगलू और तिजिया के घर की ओर बढ़ रहे थे।

यहाँ उदास मंगलू और तिजिया मिट्टी का दिया जला कंडे की आँच में आलू भूनने लगे।

उन्हें भी नन्हीं चिड़ी की मौत का दुःख था, पर जो होना था वह तो हो ही गया था।

ज्यादा कुछ खाने पीने की उनकी इच्छा भी नहीं थी।

यहाँ सूरमा” और “चरफरी” ने पास ही छुपकर घात लगायी।

तिजिया की रसोई में जलते मिट्टी के दिये को सूरमा ने अपने पंखों की हवा से बुझा दिया।

अब तिजिया और मंगलू की रसोई पूरी तरह अंधकार में डूब गयी थी ,

परन्तु सूरमा, चरफरी और कालू को सब कुछ स्पष्ट दिख रहा था।

ज्यों ही दीपक बुझा, बिच्छू चरफरी ने अपना तेज विषैला डंक किसान मंगलू के पैर पर दे मारा!

हाय-हाय! करता मंगलू तड़पकर अंधकार में जमीन पर लोटने लगा।

पति की ये दशा देख घबराती तिजिया अंधेरे में टटोलते हुए उसके पास पहुंची,

तभी उसके दाहिने हाथ में कुछ गिलगिला स्पर्श हुआ, तभी एक जोरदार दर्द से वह चीख पड़ी ।

क्योंकि सर्प कालू ने उसे डस लिया था। पति-पत्नी दोनों तड़प रहे थे,

परन्तु उनकी मदद करने वाला कोई न था। कालू का जहर इतना तेज था कि तिजिया मुंह से फैन उगलते हुये ,

कुछ पल में ही दम तोड़ चुकी थी और रात अंधेरी हो गयी थी।

मंगलू की जिन्दगी सदा सदा के लिए चिड़ा सुनुआ जैसी हो गई थी।

अब ‘कालू’ ‘चरफरी’ और ‘सुरमा सुनुआ के साथ मूसन की गाड़ी ले भारी कदमों से

‘चिड़ी’ का अन्तिम संस्कार करने जा रहे थे।

आज मंगलू जान चुका था…

आज किसान मंगलू जान चुका था कि उसने चिड़ी ‘चींची’ को बहुत छोटा समझ ,

उस पर घातक प्रहार किया था, किन्तु छोटे से चिड़े सुनुआ ने बदला ले लिया था।

बच्चों, बदले की आग में दो परिवार तबाह हो चुके थे। आज मानव समाज के इस अत्याचार से सम्पूर्ण विश्व,

पर्यावरण और सुख शांति दांव पर लग गयी है। हमें वन्य पशु, परिन्दों एवं वनस्पति की रक्षा करनी चाहिए।

आज सारी गंदगी को साफ करने वाले गिद्ध, कौवों, सर्प आदि के विनाश के साथ पर्यावरण संतुलन गड़बड़ा गया है।

कितना अच्छा होगा कि बच्चो तुम इन नन्हें परिन्दों एवं मूक पशुओं के प्रति सदा सदय रह,

विश्व पर्यावरण को सम्हालोगे।

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