Smartphones In Children - Causes, Consequences And Solutions | बच्चों में स्मार्टफोन - कारण, परिणाम और समाधान Total Post View :- 747

बच्चों में मोबाईल की आदत कैसे छुड़ाएं ; पेरेंट्स ने बताए नुस्खे

बच्चों में मोबाईल की आदत कैसे छुड़ाएं यह प्रश्न सभी पेरेंट्स के मन मे उठता रहता है। बच्चों में बढ़ रही मोबाईल की लत से सभी परेशान है। लेकिन कोई समाधान नहीं सूझ रहा है।

एक ओर कोरोना के चलते सारी शिक्षा ऑनलाइन होना तो दूसरी ओर माता पिता की व्यस्तता । ये दोनों ही ऐसे महत्वपूर्ण कारण हैं, जिसके चलते आज पूरा देश बच्चों में बढ़ रही ऑनलाइन बीमारी से पीड़ित है।

आज हम इसी विषय से सम्बंधित कुछ कारण, परिणाम और समाधान आपके सामने रखते हैं।

यदि आप भी बच्चों की इस समस्या से पीड़ित हैं, तो इससे आपको अवश्य कुछ मदद मिलेगी। यह आप जैसे अन्य सभी पेरेंट्स से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया संकलन है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं पेरेंट्स …

बच्चों में बढ़ती मोबाईल लत का क्या कारण है?

बच्चों में मोबाइल की आदत के लिए हम कुछ कारणों को जिम्मेदार मानते हैं वे इस प्रकार हैं –

ऑनलाइन शिक्षा

  • जी हां ऑनलाइन शिक्षा एक बहुत बड़ा कारण है जिसने बच्चों के हाथों में मोबाइल पकड़ा दिया ।
  • ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों के बुद्धि का विकास तो नहीं हो पाया,
  • किंतु टेक्नोलॉजी का इतना विकास हुआ कि वे मोबाइल के एडिक्ट हो गए ।
  • अब यह लत उनकी जान की दुश्मन बन चुकी हैं। यह प्रयास ऐसा ही था जैसे नासमझ बच्चों के हाथ में धारदार चाकू पकड़ा देना ।
  • जो बच्चा यह भी ना समझता हो कि इससे उसे कोई क्षति हो भी सकती है या नहीं।
  • इस तरह ऑनलाइन शिक्षा एक बहुत बड़ा कारण बनी बच्चों को मोबाइल का एडिक्ट बनाने के लिए।

माता पिता की महत्वाकांक्षा

  • दूसरा कारण स्वयं महत्वकांक्षी पेरेंट्स है। जो समय से पहले ही बच्चों से बड़ी बड़ी उम्मीदें लगा कर उन्हें अपने से दूर कर देते हैं।
  • और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने के लिए बाहर भेज देते हैं ।जिससे बच्चों के अंदर अकेलापन घर कर जाता है और वे अपने जीवन में स्वयं अपनी भावनाओं से अकेले लड़ते और जूझते रहते हैं।
  • ऐसे में मानसिक संबल के रूप में एकमात्र सहारा उनका मोबाइल ही होता है, जो 24 घंटे उनके साथ, उनका मित्र बनकर रहता है ।
  • जिस समय बच्चे को माता पिता के सबसे ज्यादा साथ की आवश्यकता होती है, उस समय वे मोबाइल से स्वयं को संस्कारित करते हैं।
  • यही संस्कार उनके जीवन की नैया को डुबो देते हैं और वे इसके एडिक्ट हो जाते हैं।

परिवारजनों की अति व्यस्तता

  • आजकल जीवन मशीन की तरह हो चुका है । प्रत्येक व्यक्ति अपने ही कामों में उलझा हुआ है । अत्यंत व्यस्त है।
  • मात्र पैसा कमाना ही एकमात्र धुन बन चुकी है या फिर स्वयं को आनंदित करना ही जीवन का मूल मंत्र हो गया है।
  • ऐसी स्थिति में बच्चों की तरफ ध्यान देना। उन्हें संस्कारित करना, उनके साथ खेलना, उन्हें समय देना, उन्हें अच्छे-अच्छे काम सिखाना या घर के ही किसी कामों में लगा कर रखने का किसी के पास भी समय नहीं होता है।
  • ऐसी स्थिति में बच्चे अलग-थलग पड़े रहते हैं। जिन्होंने अभी इस धरती पर कदम रखा ही है ।
  • दुनिया को अपनी आंखों से देखना शुरू ही करना है कि उनके हाथों में रंगीन बॉक्स मोबाइल आ जाता है,
  • और वह बाहरी दुनिया से दूर हटकर एकमात्र मोबाइल में सिमट जाते हैं। इस तरह शुरू होता है उनका जीवन चक्र।
  • जहां कि अपनी दुनिया में खोए हुए परिवार के सदस्य स्वयं ही बच्चों के हाथों में मोबाइल पकड़ा रहे हैं ।

बच्चों का अकेलापन

  • एकाकी हो रहे परिवार एवं परिवार में बच्चों की संख्या एक या दो होना।
  • संयुक्त परिवार का विघटन एवं पेरेंट्स का जॉब करना यह सभी ऐसे कारण हैं जो बच्चे में अकेला करते हैं ।
  • ऐसे में बहुत छोटे मासूम बच्चे जो मुश्किल से 1 साल 2 साल से लेकर 8-10 साल तक के है।
  • यह अपने घरों में आया के भरोसे अकेले ही रहते हैं। जिससे इनका मानसिक पोषण नहीं हो पाता और ही अंदर से खोखले रहते हैं।
  • जिस कारण इनकी मानसिक भूख नहीं मिट पाती और यह उस प्यार, विश्वास और संरक्षण की तलाश में यहां-वहां भटकने लगते हैं।
  • जिसका स्वयं माता-पिता उन्हें एक मोबाइल पकड़ा करके समाधान कर देते हैं, जो उनकी जान का दुश्मन बन जाता है।
  • ऐसे बच्चे आगे चलकर मोबाइल के बिना रह नहीं पाते और विरोध किए जाने पर अपराध करने पर उतारू हो जाते हैं।

बच्चों में मोबाईल की आदत के दुष्परिणाम

बच्चों में मोबाइल की आदत के अनेक दुष्परिणाम को है जो निम्न हैं-

  • याददाश्त का कम होना
  • बच्चों का हिंसक बनना
  • अपराधी प्रवृत्ति का होना
  • संवेदनहीन होना
  • भूख ना लगना
  • मेटाबोलिज्म कमजोर होना
  • आंखें खराब होना
  • मांस पेशियों का कमजोर होना
  • न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम होना
  • किसी भी काम में मन नहीं लगना
  • पढ़ाई नहीं करना
  • अकर्मण्य होना | आलसी होना

बच्चों में मोबाईल की आदत कैसे छुड़ाएं

यदि आप बच्चों में मोबाईल की आदत को दूर करना चाहते हैं तो इन्हें अपनाए –

बच्चों में कला का विकास करें

  • किसी भी प्रकार की कोई एक कला अपने बच्चे को अवश्य सिखाएं।
  • जैसे नृत्य, गायन, भाषण, लेखन, रंगोली, मेहंदी, ड्राइंग, पाककला, आदि।
  • यह कलाएं बच्चे को उन्नत बनाती है, जिससे वह अपना शारीरिक व मानसिक विकास स्वयं कर लेता है।
  • ये कलाएं आपके बच्चे को कभी भी अकेला महसूस नहीं होने देंगी।

बच्चे को स्वावलंबी बनाये

  • आजकल बच्चों की कम होती हुई संख्या माता-पिता का पूरा आकर्षण एक या दो बच्चे पर ही केंद्रित कर देती हैं।
  • ऐसी स्थिति में माता-पिता अपने बच्चों को पंगु बना रहे हैं।
  • जो उम्र बच्चों को काम सिखाने की है, उस उम्र में उनके कामों को माता-पिता स्वयं अपने हाथों से कर के बच्चे को परोस रहे हैं।
  • ऐसे में बच्चे का शारीरिक और बौद्धिक विकास बाधित हो रहा है। और बच्चा आलसी और गैर जिम्मेदार बन रहा है।
  • माता पिता के प्रेम की पराकाष्ठा तो मैंने यहां तक देखी है कि आठवीं नौवीं और दसवीं क्लास तक पढ़ने वाले बच्चे अपने काम करना नहीं जानते ।
  • यहां तक कि माता-पिता उन्हें नहलाना, खिलाना, कपड़े पहनाना इत्यादि स्वयं अपने हाथों से करते हैं।
  • ऐसे में बच्चा और भी डिपेंड होता चला जाता है तथा उसे कुछ भी काम करने की ना तो आदत होती है ना ही कुछ समझ पैदा हो पाती है ।
  • अब ऐसे बच्चे पढ़ लिख कर यदि कुछ बन भी गए तो भी सिवा कागजी ज्ञान के और कुछ नहीं जान पाते।
  • तथा अपने जीवन की पाठशाला में हमेशा असफल ही रहते हैं ।

बच्चों को अकेला ना रहने दें

  • छोटे बच्चे अत्यंत नासमझ होते हैं । ज्ञान का भंडार उनकी आंखें जो देखती हैं वही सीख जाती हैं।
  • जन्म से लेकर कम से कम 16 वर्ष तक बच्चे को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देना चाहिए तथा बराबर उन पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
  • यदि 1 से 16 वर्ष की उम्र तक बच्चों की इस प्रकार संरक्षण और निगरानी की जाए तो बच्चे कभी भी मोबाइल के प्रति आकृष्ट नहीं।
  • हमेशा परिवार के सदस्य की उपस्थिति बच्चे में आत्मविश्वास भर देती है और वह अपने कार्यों को करने में स्वयं को सक्षम महसूस करता है।
  • बच्चों के ज्ञान का पिटारा उनकी दादी नानी के पास होता है। बच्चों को बुजुर्गों के पास अवश्य रखें।
  • वे उनकी पहली पाठशाला होते हैं। और बच्चों को संस्कार के रूप में ज्ञानवर्धक बातें बताते हैं।

बच्चों में क्रिएटिविटी को प्रोत्साहित करें

  • बच्चों के द्वारा किए गए कार्यों के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें।
  • छोटे-छोटे कार्य जो बच्चों के द्वारा किए जाते हैं इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी दें।
  • जिससे बच्चों में सृजनात्मकता बढ़ती है और वे अपने हाथ से कुछ कर दिखाने के लिए प्रेरित होते हैं ।
  • तथा एक स्वस्थ और मेहनतकश इंसान का बीज उनके अंदर पड़ने लगता है।

बच्चों को कभी अपशब्द ना कहें

  • बच्चों के द्वारा की गई गलतियों के लिए उन्हें कठोरता से दंडित ना करें।
  • तथा कभी भी बच्चों से अपशब्द या गाली गलौज (Abuse) की भाषा में बात ना करें।
  • यह बच्चों के कोमल मन पर बहुत गहरा प्रभाव डालती है।
  • इससे बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है और वह दुनिया का सामना करने में स्वयं को कमजोर महसूस करने लगता है।
  • ऐसे बच्चे उन्नति नहीं कर पाते और हमेशा पीछे रहते हैं ।तथा अपने आप में हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं ।

माताएं अपने बच्चे को हमेशा आशीर्वाद दे

  • इस दुनिया में एकमात्र रिश्ता मां का है जो भगवान की तरह होता है।
  • प्रत्येक मां बच्चे को केवल जन्म ही नहीं देती बल्कि उससे जीवन में आगे बढ़ना और जीवन जीना सिखाती है।
  • ऐसे में माता के द्वारा बोला गया एक एक शब्द बच्चे के शरीर में जाकर चिपक जाता है ।
  • और यह शब्द उसके आसपास एक औरा बनाता है जिससे वह बच्चा सुरक्षित संरक्षित और फलता फूलता है।
  • ऐसे में माता को हमेशा अपने बच्चे को अच्छे-अच्छे आशीर्वाद ही देना चाहिए ।
  • चाहे क्रोध में हो या सुख में बच्चे को केवल और केवल मां आशीर्वाद ही दे।
  • ऐसे बच्चे हमेशा उन्नति करते हैं और अपने जीवन में पूर्णता सुखी और संतुष्ट रहते हैं।
  • जब मां अपने बच्चे को आशीर्वाद देती है कि यशस्वी हो, सुखी रहे, समृद्धिवान रहे, यशवान रहे, निरोगी रहे, गुणवान रहे।
  • तब यह शब्द न केवल आशीर्वाद होते हैं बल्कि यह शुभकामना के रूप में बच्चे को प्राप्त होते हैं, जो उसके जीवन को समृद्ध बनाते हैं।

अंत में बच्चों में स्मार्टफोन – कारण, परिणाम और समाधान

उपरोक्त बताए गए सभी कारण परिणाम और समाधान समाज मे विभिन्न तरह के लोंगों के द्वारा बताए व अनुभव किये गए हैं।

हो सकता है आप भी कुछ ऐसे बिंदु विचार में रखते हैं, जिन्हें समाज में सबके सामने अवश्य लाना चाहिए। अतः अपने विचारों को कमेंट के माध्यम से प्रस्तुत करें । जिससे आप भी इस लेख का हिस्सा बन सकें और लोगों में बच्चों की मोबाइल की लत के प्रति जागृति ला सकें ।

आशा है आपको से संबंधित यह लेख आपको अवश्य अच्छा लगा होगा। इसे अपने परिवार, मित्र व संबंधियों में अवश्य प्रेषित करें।

लेख अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद

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