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Bachchon ki hindi kahani ; chaalak Jhapaku

Bachchon ki hindi kahani ; chaalak Jhapaku ; श्रीमती मनोरमा दीक्षित, मण्डला

महाराष्ट्र की शिवालिक पहाड़ियों में किसी बब्बर शेर की बड़ी गुफा में सियार झपकू ने अपने बाल-बच्चों सहित

डेरा डाल लिया था और उसके द्वार पर बड़ी सी शिला टिकाकर चैन से रहने लगा।

शिकार को खा-पीकर जब सोने की इच्छा से शेर अपनी गुफा की ओर आया तो क्या देखता है कि

गुफा के द्वार पर शिला लगी है। यह देख उसे बहुत ज्यादा
क्रोध आया।

इधर झपकू ने देखा कि बब्बर शेर द्वार पर खड़ा है तो उसने
अपनी पत्नी सुनिया से बच्चों को रुलाने को कहा ।

बच्चे जोर जोर से रोने लगे। झपकू ने कड़ककर कहा- बच्चे क्यों रोते है? सुनिया बोली- “भूखे हैं और

शेर का मांस खाना चाहते हैं ! झपकू ने कहा- “सुबह तो
खिलाया था उन्हें शेर का मांस, फिर बच्चे क्यों रोते हैं?

सुनिया बोली- “बब्बर शेर का मांस खाना चाहते हैं। यह सुनते ही बाहर खड़ा बब्बर शेर सिर पर पैर रखकर भागा।

रास्ते में उसे सियार मिला- अरे शेर राजा पालागी, कैसे घबराकर भाग रहे हो।

अरे क्या बताऊँ, मेरी गुफा में मुझसे बड़े शेर के बच्चे शेर का मांस खाने को मांग रहे हैं,

Bachchon ki hindi kahani

“Chaalak jhapku”

मैं जान बचाकर भाग आया हूँ।” यह सुनकर सियार “सफरू” ने ठहाका लगाया।

अरे राजाजी वहाँ तो धूर्त “झपकू” है, अपने परिवार के साथ कल ही तो गया है।

यह सुनते ही शेर में कुछ हिम्मत आयी। चालाक सफरू ने कहा- “चलो मेरे साथ.मैं तुम्हारी मदद करता हूँ।

डरपोक शेर ने कहा- “चलो अपन पूंछ बांधकर चलें। उन्होंने वैसा ही किया।

अब जात के बैरी सियार सफरू को पूँछ बांधकर आते देख उसने अपनी सियारनी से फिर बच्चों को रुलाने को कहा।

बच्चे फिर जोर-जोर से रोने लगे। सियार झपकू ने कहा
“चुपाती क्यों नहीं बच्चों को वे क्या चाहते हैं?

क्या भूख के कारण रोते है? ठहरो, मेरा मंत्री सफरु शेर को पूंछ से बांधकर बस ला ही रहा है.

फिर बच्चों की भूख मिट जायेगी।” यह सुनते ही शेर दहाड़ते हुए जंगल को ओर तेजी से भागा और

पूँछ से बंधा सफरू लहूलुहान हो परलोक सिधार गया।

रौनक और सविता, दादी से यह आंचलिक कथा सुनकर बड़े प्रसन्न हुए दादी ने पूछा, क्या सीखा तुमने इस कथा से?

अरे दादी, उस शेर को समझदारी से निर्णय लेना था, उसे चालाक झपकू और उसके बच्चों की आवाज से

जान लेना था कि ये शेर के बच्चों की आवाज नहीं है। जीवन में साहसी और विवेकी ही सफल होते है।

दादी ने प्रसन्न हो उन्हें गले लगा लिया।

बच्चों ने भी दादी को प्यार करते हुए अगले दिन दूसरी नयी कहानी सुनाने को कहा।

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http://Indiantreasure. in

https://youtu.be/_jWNZJhXmVk

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