आनंद-मदिरासन के लाभ व विधि, पादादिरासन के लाभ व विधि Total Post View :- 246

आनंद-मदिरासन के लाभ व विधि, पादादिरासन के लाभ व विधि

आनंद-मदिरासन के लाभ व विधि ; योगासन लंबी आयु व स्वस्थ जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। वर्तमान के आपा-धापी वाले समय मे तनाव और थकान एक आम समस्या है। ये तनाव व थकान, मन में अस्थिरता व चंचलता पैदा करते हैं। सुखी व शांत जीवन के लिए मन का शांत होना बहुत आवश्यक है।

आज हम आपके मन की थकान , तनाव, व चंचलता को दूर करने के लिए 84 योगासन में से एक बहुत ही सरल व आसान योगासन आनंद-मदिरासन लाएं हैं। यह न केवल आपकी थकान व तनाव को दूर करेगा बल्कि आपकी चिंताओं को भी समाप्त कर देगा।

तो चलिए तैयार हो जाइए आनंद-मदिरासन करने के लिए

आनंद-मदिरासन की विधि

  • सबसे पहले वज्रासन’ की स्थिति में बैठकर, दोनों हाथों को दोनों एड़ियों के ऊपर रखें बाँहें तनी हुई तथा हथेलियाँ नीचे की ओर रहें ।
  • सिर तथा शरीर एकदम सीधे तने हुए रहें तथा दृष्टि भ्रू-मध्य भाग पर स्थिर रहें।
  • इस आसन को चाहें जब और चाहे जितनी देर तक किया जा सकता ।
  • यह प्रत्येक स्थिति में पूर्ण निरापद है। सामान्यतः इसे पाँच मिनट तक करना ही पर्याप्त रहता है।

आनंद-मदिरासन के लाभ

  • आनंद-मदिरासन के लाभ अद्भुत हैं। इसका नियमित अभ्यास चिन्ता तथा उत्तेजना को शान्त करता है।
  • इससे आत्मिक सुख तथा विश्राम प्राप्त होता है ।
  • नाड़ी संस्थान में स्थिरता आकर मानसिक शान्ति भी उपलब्ध होती है।
  • इसके माध्यम से आज्ञा अन्तः प्रज्ञा, अन्तः-प्रेरणा, आत्म-नियन्त्रण तथा मानसिक दृष्टि पर ध्यान केन्द्रित होता है।
  • यह क्रोध को दूर कर काम-वासना के वेग को शान्त करता है।
  • मन की चञ्चलता को नियन्त्रित करता है।
  • अन्य आसनों को करने के बाद थकावट आ जाने पर इस आसन के अभ्यास द्वारा विश्राम सुख प्राप्त किया जा सकता है।

टिप्पणी-

इस आसन को केवल ‘आनन्दासन’ अथवा ‘मदिरासन’ के नाम से भी जाना जाता है।

पादादिरासन की विधि व लाभ

विधि-

  • सबसे पहले ‘वज्रासन’ की स्थिति में बैठकर, दोनों हाथों की हथेलियों को अथवा
  • बंधी हुई मुट्ठियों को भुजाओं के नीचे काँखों में दबा लें,।फिर यथासम्भव हाथों का दबाव छाती पर डालें।
  • इस स्थिति में आँखें बंद रखें तथा श्वासोच्छ्वास का निरीक्षण करते रहें।
  • उक्त आसनों का अभ्यास 15 मिनट तक किया जा सकता है।

पादादिरासन के लाभ

  • इस आसन के द्वारा नासिका छिद्र में बहने वाले श्वास को एक से दूसरे छिद्र में बदला जा सकता है।
  • कुछ देर तक लगातार इसी स्थिति में बने रहने से दोनों नासा छिद्रों से श्वास प्रवाहित होने लगता है।
  • इससे शरीर का शिथिलीकरण होता है तथा ‘बजासन’ के अन्य सभी लाभ प्राप्त होते हैं।
  • प्राणायाम की तैयारी में यह आसन अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है।

निष्कर्ष

आज आपने आनंद-मदिरासन के लाभ व विधि एवं पादादिरासन के लाभ व विधि जानी। आशा है आपको सम्बन्धित जानकारी अवश्य अच्छी लगी होगी।

हमारे अन्य लेखों में उत्तानपादासन करने की विधि व लाभ एवं शलभासन की विधि व लाभ आदि अनेक योगासनों की जानकारी दी गई है। अवश्य पढ़ें।

लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद

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2 thoughts on “आनंद-मदिरासन के लाभ व विधि, पादादिरासन के लाभ व विधि

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