सोमवती अमावस्या को करें शिव आराधना। Total Post View :- 644

सोमवती अमावस्या को करें शिव आराधना और पितृ तर्पण । जानिए पूजनविधि व महत्व!Shiva worship and Pitru tarpan to Somavati Amavasya. Know worship and importance!

सोमवती अमावस्या को करें शिव आराधना व पितृ तर्पण। यूं तो अमावस्या प्रत्येक माह में एक बार आती है।

प्रत्येक माह में 15-15 दिन के दो पखवाड़े (पक्ष) होते हैं । जिन्हें क्रमशः शुक्लपक्ष व कृष्ण पक्ष कहते हैं।

शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है। और कृष्णपक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है।

उस पर भी जिस माह सोमवार को अमावस्या पड़ती है उसे ही सोमवती अमावस्या कहा जाता है।

इस वर्ष 2021 में 12 अप्रैल को वर्ष की पहली व अंतिम सोमवती अमावस्या पड़ रही है।

सोमवती अमावस्या दानपुण्य, व शिव पूजन व पितृपूजन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है।

आज इस लेख में आप पाएंगे सोमवती अमावस्या से सम्बंधित समस्त जानकारी

  • सोमवती अमावस्या को क्या करें।
  • आज किस देवी देवता की पूजा की जाती है।
  • अखण्ड सौभाग्य पाने के लिए क्या करें।
  • पितृदोष मिटायें व अक्षय धन के भंडार पाएं।

आइये जानते हैं इस सोमवती अमावस्या को क्या करें!Let us know what to do on this Somvati Amavasya!

  • आइये जानते हैं कि सोमवती अमावस्या को ऐसा क्या करें की जिससे जीवन मे सुख शांति हो।
  • निर्णय सिंधु के व्यास वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान ध्यान करने से सहस्त्र गोदान का पुण्यफल प्राप्त होता है।

सिनीवाली कुहूर्वापी यदि सोमदिने भवेत।

गोसहस्त्र फलं दद्यात स्नानं वै मौनिना कृतम।।

  • इस दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगाजल से मौन रहकर स्नान करें। गंगाजल से पूरे घर को पवित्र करें।
  • व शिव परिवार की पूजन करें। जिसमें शिव पार्वती गणेश कार्तिकेय व नन्दी शामिल हैं।
  • आज के दिन व्रत रखने का विधान बताया गया है। अतः सुबह ही शिवजी के समक्ष व्रत का संकल्प करें।
  • पूरे दिन शांत व एकाग्र मन से ॐ नमः शिवाय का जप मन ही मन करें।
  • अमावस्या के दिन सूर्य व चन्द्रमा एक ही सीध में होते हैं और चन्द्रमा मन के कारक है।
  • मन को एकाग्र करने के लिए अमावस्या तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण है और किये गए जप तप प्रभावशाली होते हैं।

सोमवती अमावस्या को किस किस देवता की पूजा करनी चाहिए।Which god should be worshiped on Somavati Amavasya.

  • यह जानना महत्वपूर्ण है कि सोमवती अमावस्या को किस किस देवी देवता की पूजा की जावे।
  • आज के दिन शिव परिवार की पूजा होती है। तथा सूर्य देवता, तुलसी माता, व पितरों को तर्पण किया जाता है।
  • समस्त दोषों को दूर करने सक्षम , व थोड़े से में प्रसन्न होने वाले देवता भगवान शिव हैं।
  • जिनकी आराधना व भक्तिभाव से स्मरण मात्र से सारे क्लेश दूर हो जाते हैं।

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सोमवती अमावस्या को अखण्ड सौभाग्य पाने का अचूक उपाय।Surefire way to get unbroken good fortune for Somavati Amavasya.

  • सुहागवती स्त्रियों के लिए आज का दिन अखण्ड सौभाग्य को प्रदान करने वाला है।
  • अतः गंगाजल से स्नान कर और व्रत या पूजा का संकल्प लेकर पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करें । भगवान विष्णु की पूजन करें।
  • परिक्रमा हेतु पहले से ही 108 फल या अन्य कोई भी वस्तु 108 की संख्या में गिनकर रख लें।
  • इसके बाद पीपल वृक्ष को बिना छुए प्रत्येक परिक्रमा में एक एक फल या वस्तु वृक्ष को समर्पित करें।
  • इस प्रकार 108 परिक्रमा पूर्ण करें और अखण्ड सौभाग्य की प्रार्थना करें।
  • परिक्रमा करने के बाद समापन के समय सभी फल या सामग्री वेदपाठी ब्राम्हण ( मंदिर के पुजारी) को दान करें।

सोमवती अमावस्या को करें पितृ तर्पण ।Offer paternity to Somavati Amavasya.

  • शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि सोमवती अमावस्या को पितरों को तर्पण करना चाहिए।
  • पितृदोष से मुक्ति के लिए यह अति उत्तम उपाय है जिससे पितृ प्रसन्न होकर, आशीर्वाद देते हैं।
  • इस दिन शिवजी की पूजा से अखण्ड सौभाग्य उदय होता है और अक्षय धन के भंडार खुल जाते हैं।
  • सोमवती अमावस्या को पवित्र नदियों में स्नान व दान करने का बहुत महत्व है किन्तु कोरोना महामारी से ऐसा सम्भव नही है।
  • अतः घर पर ही सूर्योदय के पूर्व नहाने के जल में गंगाजल डालकर मौन होकर स्नान करें।

यह पर्व स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य प्रदान करने वाला है। इस दिन किया गया जप तप सहस्त्र गुना फल देने वाला है।

अंत मे सोमवती अमावस्या अखण्ड सौभाग्य के साथ साथ अक्षय धन की प्राप्ति करने का उत्तम पर्व है।

इस दिन पितृ तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है इसलिए सोमवती अमावस्या को अवश्य करें ये उपाय।

सोमवती अमावस्या की व्रत कथा

https://youtu.be/jn_E7V3F8FI

सम्बन्धित जानकारी यदि अच्छी लगी हो तो अपने मित्रों व परिजनों को भी प्रेषित करें।

ऐसी ही अनेक जानकारियों के लिए नीचे दिये लिंक पर आएं

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