सुंदरकांड का महत्व व फायदे | Importance And Benefits Total Post View :- 155

सुंदरकांड का महत्व व फायदे | Importance Of Sunderkand;

सुंदरकांड का महत्व व फायदे ; पढ़ने का सही समय व तरीका | Importance And Benefits Of Sunderkand; हनुमानजी कलयुग में जीवित देवता है। उन्हें प्रसन्न करना भी बहुत आसान है। इनकी भक्ति करने के विशेष दिन मंगलवार एवं शनिवार हैं।

हनुमानजी की भक्ति का सुंदर रूप सुंदरकांड में देखने को मिलता है। जिसमें हनुमान जी द्वारा किए गए पराक्रम का वर्णन मिलता है। सुंदरकांड में हनुमान जी भगवान श्री राम के समस्त कष्टों को दूर करते हैं।

वह सीता जी के भी समस्त कष्टों को दूर करते हैं और वे श्री लक्ष्मण जी के भी समस्त कष्टों को दूर करते हैं। इस प्रकार समस्त कष्टों का निवारण करने में समर्थ होते हैं।

सुंदरकांड का महत्व व फायदे

सुंदरकांड का महत्व व फायदे को श्री हनुमान जी के द्वारा किए गए कार्यों से इस प्रकार समझा जा सकता है,

भगवान श्रीराम जी की मदद

  • स्वयं समर्थ श्री राम जी की मदद करने के लिए हनुमान जी के द्वारा समुद्र को पार करना ।
  • लंका में प्रवेश कर माता सीता की खोज करना एक विलक्षण कृत्य है ।
  • जो यह बताता है कि श्री हनुमान जी समस्त बाधाओं को पार करने और लक्ष्य की पूर्ति कराने में पूर्णत: सक्षम है ।
  • जिन्होंने स्वयं श्री भगवान राम की मदद की । वह हमारी भवसागर को पार करने में बहुत मदद करते हैं।

श्री सीता माता की मदद

  • हनुमान जी के द्वारा श्री सीता माता की मदद करना भी यह बताता है, कि वह दांपत्य जीवन को मधुर सुदृढ़ एवं एक करने में सक्षम हैं।
  • सुंदरकांड के पाठ के द्वारा दांपत्य जीवन की समस्त कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।
  • सुंदरकांड पति पत्नी के बीच की अंतर्कलह को मिटाता है एवं आपस में प्रेम और सद्भाव उत्पन्न करता है।

श्री लक्ष्मणजी की मदद

  • श्री लक्ष्मण जी को जब शक्ति बाण लगता है और वे बेहोश हो जाते हैं, तब उस समय श्री हनुमान जी का पराक्रम एवं उनकी सेवा का भाव प्रकट होता है।
  • संजीवनी पर्वत को लाकर श्री लक्ष्मण जी की मूर्च्छा को दूर करना यह पराक्रम यह दर्शाता है,
  • कि सभी प्रकार के रोग दोष एवं बाहरी बाधाओं को दूर करने में श्री हनुमानजी महाराज पूर्णतः सक्षम हैं।

श्री विभीषण जी की मदद

  • सुंदरकांड में प्रभु की भक्ति को श्री विभीषण जी को दिलाना एवं भगवान श्री राम से उन्हें मिलाना एक अद्भुत प्रक्रिया है।
  • जिससे स्पष्ट होता है कि श्री हनुमान जी महाराज भगवान श्री राम के दूत हैं ।
  • वे भगवान के भक्तों को उनसे मिलाने में पूर्णत: सक्षम है।
  • जो भी सच्चे ह्रदय से हनुमान जी को प्रसन्न में करता है एवं सुंदरकांड का पाठ करता है। वह भगवान श्री राम की भक्ति को भी प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार सुंदरकांड का महत्व व फायदे प्रकट होते हैं। सुंदरकांड के पढ़ने से व्यक्ति समस्त लक्ष्यों को प्राप्त करता है। उसके जीवन से सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं ।

पारिवारिक जीवन सुखमय हो जाता है। भगवान की भक्ति प्राप्त होती है एवं समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।

आइए जानते हैं सुंदरकांड के पढ़ने का सही तरीका क्या है….

सुंदरकांड पढ़ने का सही समय व तरीका

  • शास्त्रों के अनुसार सुंदरकांड को पढ़ने का विशेष समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:00 से 6:00 तक का होता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त में किया गया पाठ सभी प्रकार की सिद्धि और सफलता को प्राप्त कराता है ।
  • जिस भी मनोकामना को रखते हुए ब्रह्ममुहूर्त में सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो वह मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।
  • हनुमान जी के विशेष दिन मंगलवार और शनिवार से सुंदरकांड का पाठ करना प्रारंभ करना चाहिए।
  • इसका एकल पाठ ब्रह्म मुहूर्त में एवं सामूहिक पाठ शाम 7:00 बजे के बाद करना शुभ फलदाई होता है ।
  • कलयुग के जागृत देवता हनुमान जी जहां कहीं भी सुंदरकांड व रामचरितमानस का पाठ होता है, वहां उपस्थित हो जाते हैं, एवं बड़े मनोयोग से उसका श्रवण करते हैं।
  • शुद्ध मन से शुद्ध स्थान पर पवित्रता के साथ से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए ।
  • सुंदरकांड का पाठ मंगलवार के दिन से प्रारंभ करें ।
  • लगभग 40 दिन तक सुंदरकांड का विधिवत पाठ करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
  • सुंदरकांड के पाठ में श्री सीताराम जी के दरबार के फोटो या मूर्ति स्थापित कर पाठ करें।
  • पूजा स्थल में मूर्ति या फोटो के समक्ष एक गिलास या लोटे में जल अवश्य रखें।
  • सुंदरकांड का पाठ करने के पश्चात इस जल को स्वयं पी ले ।
  • यह जल आपके जीवन की सभी नकारात्मकता को दूर करता है।

सुंदरकांड पढ़ने में एकाग्रता कैसे उत्पन्न करें

  • सुंदरकांड में कुल 60 दोहे हैं तथा शुरुआत में इसे पढ़ने में लगभग एक से डेढ़ घंटा लग सकते हैं।
  • इतनी देर तक एकाग्रता से बैठ पाना सभी के लिए संभव नहीं हो पाता ना ही इतना समय ही निकल पाता है ।
  • ऐसे में सुंदरकांड की शुरुआत करने के लिए किसी भी शुभ दिन मंगलवार का चयन करें ।
  • जितना अधिकतम से अधिकतम दोहा आप पढ़ सकते हैं 2, 5, 7, 11, 21, 31 अधिक संख्या में पाठ करें ।
  • इस प्रकार दो मंगलवार या तीन मंगलवार तक अपनी सुंदरकांड का समापन करें।
  • या दो से 3 दिन लगातार पढ़कर एक सुंदरकांड को पूरा करें।
  • दोहों की संख्या को नित्य बढ़ाते जाए । जिससे पहले दिन दो दोहा, फिर पांच दोहा, फिर सात दोहा….
  • ऐसे करते-करते जब संख्या बढ़ती जाएगी तो एक समय ऐसा आएगा कि आप आधी सुंदरकांड एक सिटिंग में,
  • फिर आधी दूसरे सिटिंग में या सुबह आधी, शाम आधी सुंदरकांड पढ़ें।
  • फिर भगवान की स्वयं प्रेरणा होती है और आप उसे पूरा करने के लिए सक्षम और समर्थ हो जाते हैं ।
  • यह हनुमान जी की पहली कृपा होती है क्योंकि बिना कृपा के आप भक्ति का वरदान पा ही नहीं सकते ।
  • तो जब तक कृपा ना हो तब तक उस ओर थोड़ा-थोड़ा श्रमदान अवश्य करें।
  • जिससे आपको भक्ति का वरदान प्राप्त हो और आप पूरी सुंदरकांड पढ़ने में समर्थ हो जाएंगे।
  • सुंदरकांड का महत्व व फायदे अनगिनत हैं।

सुंदरकांड पढ़ने के फायदे

जो लोग नियमित सुंदरकांड का पाठ करते थे उनसे सुंदरकांड का महत्व व फायदे जानने के लिए जब हमने लोगों से बातचीत की तो उन्होंने अपने अनुभव इस प्रकार बताएं,

  • सुंदरकांड पढ़ने के फायदे उनके जीवन में इस प्रकार हुए की नकारात्मकता दूर होती चली गई एवं सकारात्मक भावों का जन्म हुआ।
  • कुछ के जीवन में सारी बाधाएं दूर हो गईं और वे अपने लक्ष्य में सफल होने लगे ।
  • जिन्होंने किसी रोग दोष को दूर करने की कामना रखते हुए उक्त सुंदरकांड का पाठ किया, उन्हें उचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और वे सुलभ चिकित्सा सेवा का लाभ उठाकर शीघ्र स्वस्थ हो सके।
  • कुछ लोगों के दांपत्य जीवन में हो रहे मनमुटाव दूर हुए तथा पारिवारिक अंतर कलह पूर्णतः समाप्त हो गई।
  • कोर्ट कचहरी और मुकदमे बाजी से मुक्ति व विजय प्राप्त हुई ।
  • भाइयों के आपसी बैर दूर हुए एवं एक दूसरे से प्रेम व सौहार्दत्ता बढ़ने लगी।
  • विद्यार्थियों को अध्ययन में उचित सहायता मिली और वे अपनी परीक्षाओं में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण हुए ।
  • कुछ लोगों के ह्रदय में भक्ति का उदय हुआ और वे भगवान श्री राम की भक्ति की ओर अपने आप झुक गए।
  • मानसिक व शारीरिक कष्टों और रोगों से छुटकारा प्राप्त हुआ।
  • बाहरी हवा, एवं भूत प्रेत बाधाओं से भी मुक्ति प्राप्त हुई।
  • जिस घर में नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ होता है उस घर से समस्त नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
  • एवं वहां सुख समृद्धि शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित हो जाता है।
  • चारों तरफ से उचित मार्गदर्शन प्राप्त होने लगते हैं डूबते को किनारा दिखने लगता है।
  • आपकी समस्त समस्याएं अचानक से लुप्त नहीं होती बल्कि उन समस्याओं के निवारण का मार्ग प्रदान होता है ।
  • जिस पर चलकर हम उत्पन्न समस्याओं से मुक्ति पाते हैं।

अंत मे

  • भगवान की भक्ति सबसे आसान और सुलभ रास्ता है उनकी कृपा प्राप्त करने का।
  • अतः सच्चे हृदय से मन के भाव को प्रभु को समर्पण करें।
  • किसी भी प्रकार का आडंबर और कठिनाई भक्ति के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए ।
  • भक्ति करने के लिए जो आपका मन करे उसी प्रकार से भगवान की भक्ति को करें यही सबसे सरल और सही तरीका होता है ।
  • भगवान फल पत्र पुष्प या जल किसी भी चीज से संतुष्ट हो जाते हैं।
  • मुख्य चीज तो भाव होता है ।
  • यदि आप मानसिक निवेदन भी करते हैं तो ईश्वर आपके भावों को समझ कर आप को वरदान देते हैं।
  • आशा है आप को सुंदरकांड का महत्व व फायदे अवश्य समझ आए होंगे और आप उनका अवश्य पाठ करेंगे।
  • अंत तक लेख को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।
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