षटतिला एकादशी व्रत ! Shatatila ekadashi व्रत! Total Post View :- 886

षटतिला एकादशी व्रत ! Shatila ekadashi vrat!

षटतिला एकादशी व्रत 7 फरवरी 2021 को है। यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है।

एकादशी तिथि के मुख्य देवता श्री हरि भगवान विष्णु है। यह तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

इस लेख में आप पाएंगे-

  • एकादशी का महत्व।
  • क्या करना चाहिए।
  • पूजन सामग्री।
  • पूजन की तैयारी।
  • पूजनविधि।
  • व्रतकथा।
  • व्रत का लाभ।
  • आरती।

1-महत्व! Importance!

  • यह तिथि मोक्षदायक होने के साथ-साथ घोर पाप,भीषण रोग और हत्या आदि भव बंधनों से छुटकारा दिलाती है।
  • भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होने के कारण यह दिन माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का भी विशेष दिन होता है।
  • अतः जिसे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करनी होती है वह भगवान विष्णु की प्रार्थना एवं पूजा अवश्य करें।
  • इस दिन किया गया जप यज्ञ एवं पूजा भगवान स्वीकार करते हैं।
  • इस दिन किया गया दान भी अवश्य फलित होता है। अतः सुयोग्य पात्र को कुछ ना कुछ अवश्य दान करें।

2- यह अवश्य करें! Do it!

  • इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग किया जाता है इसीलिए इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है।
  • स्नान के जल में तिल को डालकर तिल से स्नान करें। तिल का उबटन लगाएं।
  • तिल को भगवान को भोग लगाएं। तिल को भगवान को समर्पित करें। पंचामृत में तिल का उपयोग करें।
  • तिल का प्रसाद खाएं। एवं तिल का दान करें। एवं तिल को पीने के पानी में डालकर पीना चाहिए।
  • इस प्रकार स्नान, ऊबटन, खान, पान और दान भगवान को भोग लगाकर तिल का उपयोग करें।

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2- पूजन सामग्री! Worship materials!

  • षटतिला एकादशी व्रत में पूजन सामग्री में तिल, तिल का तेल एवं तिल का प्रसाद अवश्य रखें।, पान व तुलसी पत्र रखें।
  • भगवान विष्णु को समर्पित करने के लिए पीले पुष्प एवं माता लक्ष्मी के लिए कमल के पुष्प भी रखें।
  • अन्य पूजन सामग्री में प्रसाद के रूप में तिल के लड्डू या अन्य प्रकार से तिल का प्रसाद व केला रखें।
  • तिल के तेल से डूबी हुई बत्तियां कलश, गौरी गणेश एवं नवग्रह की स्थापना करे। आम के पत्तों से तोरण बनाए।
  • पंचामृत में तिल अवश्य डालें। हल्दी,कुमकुम,बंदन,कपूर, गंगाजल आदि समस्त सामग्री एकत्र कर ले।

इसे अवश्य पढ़ें? किसी भी पूजा की तैयारी कैसे करें ?

3- पूजन की तैयारी करें! Prepare for worship!

  • सुबह सूर्योदय के पूर्व उठकर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी का स्मरण करें। जल में गंगाजल, तिल डालकर स्नान करें।
  • भगवान के समक्ष जाकर हाथों में गंगाजल,तिल पुष्प और सिक्का लेकर व्रत का संकल्प करें।
  • पूर्व से तैयार की गई तोरण की पूजा करें। अब इसे घर के मुख्य द्वार पर लगा दें।
  • कलश, गौरी गणेश, नवग्रह की स्थापना करें। पूजन की समस्त तैयार सामग्री को पूजा स्थल पर रख ले।
  • भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो को एक पटे पर केले का पत्ता बिछाकर उस पर विराजित करें।

4- पूजन विधि! Worship Method!

  • सर्वप्रथम कलश का दीप प्रज्वलित करें । अब श्री गणेश गौरी की पूजन करें। अब स्थापित नवग्रह की पूजन करें।
  • अब भगवान विष्णु की एवं माता लक्ष्मी की पूजा प्रारंभ करें।
  • पूजा करते समय “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करते रहें।
  • हल्दी कुमकुम तिल एवं पंचामृत से भगवान विष्णु का पूजन करें । शुद्ध गंगा जल से भगवान को स्नान कराएं।
  • भगवान को तिल के प्रसाद का एवं केला का भोग लगाएं । अब पूर्ण श्रद्धा के साथ आरती करें।

5- षटतिला एकादशी व्रत कथा ! The story

  • प्राचीन काल में वाराणसी में एक गरीब अहीर रहता था। दीनता से वह कभी-कभी भूखा ही सो जाता।
  • व बच्चों सहित आकाश के तारे गिनता रहता। उसकी जिंदगी बसर करने का सहारा जंगल की लकड़ी ही थी।
  • वह भी जब ना बिकती तो वह फांके मारता रह जाता। एक दिन लकड़हारे ने बहुत सी लकड़ियां इकट्ठी कीं।
  • और लकड़हारा किसी साहूकार के घर लकड़ी पहुंचाने गया। वहां जाकर उसने देखा;
  • कि उत्सव के पहले की तैयारी की जा रही है। उसने साहूकार से पूछा कि यह किस चीज की तैयारी हो रही है।

6- व्रत का लाभ! Benefits of fasting!

  • तक सेठ जी बोले वह तो यह षटतिला व्रत की तैयारी की जा रही है।लकड़हारे ने इस व्रत के करने का लाभ पूछा।
  • साहूकार ने बताया कि इससे घोर पाप, रोग आदि बंधनों से छुटकारा होकर, धन व पुत्र की प्राप्ति होती है।
  • यह सुनकर साहूकार से अहीर ने पूजा की सारी विधि पूछी और अपने घर आकर अपनी स्त्री सहित;
  • उस दिन के पैसे से,सामान खरीदकर एकादशी का व्रत रखा जिसके परिणाम स्वरुप वह कंगाल से राजा हो गया ,
  • और वाराणसी नगरी में एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया जाने लगा।

वृत्त की महिमा बताते हुए गोस्वामी जी ने लिखा है -” सोई जानई जेहि देई जनाई!”

7-आरती! Aarti

षटतिला एकादशी व्रतविधि
षटतिला एकादशी व्रत पूजा
  • ओम जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे, भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे । ओम जय जगदीश हरे ।
  • जो ध्यावे फल पावे दुख बिनसे मन का, सुख संपति घर आवे कष्ट मिटे तन का। ओम जय ….
  • मात पिता तुम मेरे शरण गहूं मैं किसकी, तुम बिन और न दूजा आस करूं मैं किसकी। ओम जय……
  • तुम पूरण परमात्मा तुम अंतर्यामी ,पारब्रह्म परमेश्वर जगत पिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी। ओम जय ……
  • तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता, मैं मूर्ख खल कामी मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भरता। ओम जय …….

इसे पढें? पूजा में आरती कैसे करें ! आरती का महत्व व विधि! माँ अम्बे जी की आरती!

  • तुम हो एक अगोचर सबके प्राण पति, किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति । ओम जय……
  • दीनबंधु दुखहर्ता तुम रक्षक मेरे अपने हाथ उठाओ अपनी शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे। ओम जय……
  • विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ श्रद्धा प्रेम बढ़ाओ संतन की सेवा। ओम जय …..….
  • तन मन धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा, तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा । ओम जय …..
  • त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे ,कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे । ओम जय …..
  • ओम जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे,भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट क्षण में दूर करे। ओम जय…

इस प्रकार पूरे भाव भक्ति के साथ एकादशी का व्रत, पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

एकादशी के दिन श्रीमद्भागवत गीता का पाठ या श्रवण अवश्य करना चाहिए।

आशा है आपको षटतिला एकादशी व्रत व पूजन में मदद मिलेगी। आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो दोस्तों को शेयर करें।

ऐसे ही अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए अवश्य पढ़ें।??

http://Indiantreasure.in

?श्रीमद्भगवत गीता सम्पूर्ण सार( हिंदी में )
अवश्य सुनें
???

https://youtu.be/iWK0xa6XPg8
अवश्य सुने।

✍️श्रीमती रेखा दीक्षित एडवोकेट, सहस्त्र धारा रोड देवधरा,मण्डला।?यह आलेख पूर्णतः मौलिक व स्वरचित है।

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