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भोजन करने के नियम ; अवश्य दें पंच प्राणाहुति !

आज हम आपको भोजन करने के नियम के बारे में बताएँगे। प्राचीन समय से ही हमारे शास्त्रों और आयुर्वेद में इसका उल्लेख किया गया है। हमारे पूर्वजों द्वारा भी भोजन करते समय कुछ प्रक्रियाएं की जाती थी जिन्हें समय के अंतराल से धीरे-धीरे सभी भूलते जा रहे हैं।

एक ओर जहां चटाई और पटा की बैठक की जगह डाइनिंग टेबल और चेयर ने अपना स्थान बना लिया है । वहीं जमीन पर पालथी मोड़ पर बैठने के स्थान पर खड़े होकर चेयर पर बैठ कर खाना आधुनिकता प्रतीक बन चुका ।

यह सब भोजन करने की प्रक्रिया के विरुद्ध माना जाता था आज उसी के परिणाम स्वरूप अच्छा भोजन करने के बावजूद भी लोग किसी न किसी बीमारी से परेशान रहते। आइए पुरानी यादों को संजोते हैं और याद करते हैं हमारे भोजन करने के नियमों को

भोजन करने के नियम !!

  • सबसे पहले पैर धोकर व कुल्ला करके भोजन के लिए बैठना चाहिए।
  • सुखआसन अर्थात पालथी मार के कमर को सीधी रखकर भोजन किया जाना चाहिए।
  • भोजन करने के पूर्व हाथ जोड़कर ईश्वर से भोजन प्राप्ति हेतु धन्यवाद करें ।
  • थाली के चारों ओर जल घुमाकर भोजन शुरू करें।
  • सर्वप्रथम ओम भूर्भुव: स्व: कहकर दो बार आचमन करें ।
  • फिर तीन कौर – 1-ॐ भूपतये स्वाहा, 2- ॐ भुवनपतये स्वाहा और 3- ॐ भूतानां पतये स्वाहा कहकर निकाल देना चाहिए ।
  • ऐसा करते हुए सभी देवों को याद करें । इससे 14 भवन के स्वामी और समस्त विश्व के जीव तृप्त हो जाते हैं।

पंच प्राणाहुति !

  • अब ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा कह कर एक बार आचमन करें।
  • और मौन होकर 5 प्राण आहुति अर्थात 5 कौर बेर के बराबर मौन होकर स्वयं ग्रहण करें।
  • और प्रत्येक कौर के साथ निम्न मंत्र बोलते जाए
  • प्रथम कौर – ॐ प्राणाय स्वाहा
  • द्वितीय ॐ – अपानाय स्वाहा
  • तृतीय कौर – ॐ व्यानाय स्वाहा
  • चतुर्थ कौर – ॐ उदानाय स्वाहा
  • पांचवां कौर – ॐ समानाय स्वाहा, कहकर ग्रहण करें।

इस प्रकार पांच प्राण आहुति देकर मौन तोड़ें । भोजन की प्रशंसा करते हुए प्रसन्न चित्त से भोजन करें ।

जिनके पिता व भाई जीवित हो उन्हें केवल पंच आहुति तक मौन रहना चाहिए।

वैसे भोजन के समय अनावश्यक बातें नहीं करनी चाहिए। अंत में बेर के बराबर भोजन छोड़ देना चाहिए ।

उसे अपने दाहिने हाथ की हथेली में लेकर पितरों के निमित्त कौओं को खिला देना चाहिए।

इस तरह जितना ज्यादा संभव हो भोजन करने के नियम का पालन करें एवं पंच प्राणाहुति अवश्य दें ।

इससे हमारे शरीर मे स्थित पांचों वायु तृप्त होती है। और शरीर स्वस्थ रहता है।

जिससे स्वस्थ व समृद्ध जीवन प्राप्त हो सके। भोजन करने के नियम कि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो इससे अवश्य शेयर करें ।

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