भुजंगासन करने के लाभ व विधि | Benefits And Method Of Doing Bhujangasana Total Post View :- 243

भुजंगासन करने के लाभ व विधि | Benefits And Method Of Doing Bhujangasana

भुजंगासन करने के लाभ व विधि | Benefits And Method Of Doing Bhujangasana – पेट सम्बन्धी सभी समस्याओं से निजात दिलाता है भुजंगासन। सर्प अर्थात साँप की तरह मुद्रा होने से इसे सर्पासन या सर्प-मुद्रा भी कहते हैं।

इसे सभी आयु के व्यक्ति आसानी से कर सकते हैं। यह महिला या पुरुष कोई भी कर सकते हैं। मात्र 6-7 सेकेंड पांच से सात बार भुजंगासन करने के लाभ बहुत अधिक हैं। आइए जानते हैं, 84 योगासन की लिस्ट में शामिल भुजंगासन करने के लाभ व विधि

भुजंगासन करने की विधि

  • भुजंगासन करने के लिए पेट के बल फर्श पर सीधे लेट जाएं।
  • अब दोनों हथेलियों को पृथ्वी पर इस प्रकार जमाएं कि वे कन्धों के किनारे के ठीक नीचे रहें।
  • दोनों हाथों की अँगुलियाँ परस्पर सटी रहें तथा उनके अग्र भाग कन्धों की रेखाओं के किनारे रहने चाहिएं।
  • दोनों कुहनियाँ मुड़ी हुई तथा शरीर के मध्य-भाग को स्पर्श करती रहनी चाहिएं ।
  • अब अपने दाँये अथवा बाँये गाल को भूमि पर रखते हुए पाँव की एड़ियों को आपस में सटाएं तथा
  • उनके अँगूठों को फर्श पर सपाट रखते हुए, सिर को सीधा कर ठोड़ी को भूमि पर रखें।
  • फिर गर्दन तथा सिर को पीछे की ओर झुकाना आरम्भ करें तथा श्वास लेते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाएं।
  • नाभि को भूमि पर अथवा उसके एकदम समीप ही रखना चाहिए।

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  • कमर से लेकर नीचे पाँव तक की अँगुलियों का भाग अर्थात् दोनों पाँव पूरी तरह कड़े बने रहने चाहिए।
  • ऊपर की ओर देखते हुए श्वास को रोके रहें, शरीर को कड़ा बनाये रहें तथा दोनों कुहनियाँ मुड़ी हुई और धड़ के समीप रहें ।
  • इस अवस्था में 6 से 8 सैकिण्ड तक रखें। फिर धीर-धीरे श्वास को छोड़ते हुए सिर को पृथ्वी की ओर झुकाना आरम्भ करें।
  • जितनी देर में सिर भूमि का स्पर्श करे उतने ही देर में श्वास छोड़ने को क्रिया भी पूरी हो जानी चाहिए।
  • सिर का भूमि से स्पर्श हो जाने के बाद उसे दायीं ओर घुमाकर एक गाल को भूमि पर रख दें।
  • साँस छोड़ते तथा पूर्वावस्था में लौटते समय शरीर को ढीला कर देना चाहिए।
  • इसके बाद 6 से 8 सैकिण्ड तक विश्रामः करना चाहिए।
  • इसी प्रकार प्रत्येक चक्र को पूरा कर विश्राम लेते हुए उक्त अभ्यास को पाँच बार दुहराएं।

विशेष टीप

  • कुछ लोग कुहनियों को ऊपर उठाते समय पीछे फैले हुए दोनों पाँवों के पंजो को फर्श से न सटाये रखकर केवल पाँव की अंगुलियों को ही फर्श से सटाये रहते हैं।
  • आरम्भ में इस आसन का अभ्यास केवल तीन बार ही करना चाहिए।
  • बाद में पाँच बार तक दुहराना चाहिए।

भुजंगासन करने के लाभ

भुजंगासन करने के गुणात्मक लाभ

  • यह आसन स्त्री पुरुष दोनों के लिए हितकर है। इससे गुणात्मक तथा शारीरिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते है।
  • यह आसन अभ्यासी को निर्भीक, साहसी तथा वीर बनाता है। यह इसका गुणात्मक प्रभाव है।

भुजंगासन करने के शारीरिक लाभ

  • शारीरिक दृष्टि से यह आसन गर्दन, छाती मुख तथा सिर को अत्यधिक क्रियाशील बनाता है।
  • इस अभ्यास से शरीर के ऊपरी भाग की क्रियाशीलता में विशेष वृद्धि होती है।
  • यह मेरुदण्ड में लचीलापन लाकर उसके दोषों को दूर करता है
  • तथा पेट के अनेक रोगों को दूर कर भूख को बढाता है ।
  • इसके अभ्यास से शरीर में शक्ति तथा स्फूर्ति की वृद्धि होती है तथा कोष्ठबद्धता, वायु विकार, स्वप्नदोष, अपच आदि बीमारियाँ दूर होती हैं।
  • यह ज्ञानेन्द्रियों की शक्ति को बढ़ाता मोटापे को दूर करता तथा रक्त संचार को तीव्र बनाता है।
  • इसके प्रयोग से मसाने की बीमारियाँ दूर हो जाती हैं । यह यकृत् सम्बन्धी दोषों को दूर करता है।
  • स्त्रियों के यौनाङ्ग तथा गर्भाशय को पुष्ट बनाता है ।
  • प्रदर, मासिक धर्म के समय अधिक अथवा अल्प रक्तस्राव आदि की शिकायतों को दूर कर उसे नियमित बनाता है।
  • यह स्त्रियों के सौन्दर्य की वृद्धि भी करता है। परन्तु गर्भवती स्त्रियों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • सामान्य स्थिति में किये जाने वाले अभ्यासों में यह अत्युत्तम माना गया है।
  • सरल होने के कारण प्रत्येक आयु के स्त्री पुरुष इसके नियमित अभ्यास से अनेक लाभ उठा सकते हैं।

निष्कर्ष

योगासन हमारे ऋषि मुनियों द्वारा स्वास्थ्य लाभ के लिए गई बहुत प्राचीन परंपरा है। बीमारियों से दूर रहने व स्वस्थ रहने के लिए योगासन का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए।

आशा है आपको भुजंगासन करने के लाभ व विधि | Benefits And Method Of Doing Bhujangasana सम्बन्धी यह लेख अवश्य पसंद आया होगा।

अपने मित्रों व परिजनों को योगासन करने हेतु अवश्य प्रोत्साहित करें। “पहला सुख निरोगी काया” लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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