प्रदोष व्रत कैसे करें : जानिए पूजनविधि, पूजनसामग्री व स्तुति !How to do Prados fast; know poojan Vidhi, worship material and sooti. Total Post View :- 798

प्रदोष व्रत कैसे करें : जानिए पूजनविधि, पूजनसामग्री व स्तुति।How to do Pradosha fast: know poojan Vidhi, worship material and stooti.

प्रदोष व्रत से भगवान आशुतोष को कैसे करें प्रसन्न। त्रयोदशी तिथि में सायंकाल को प्रदोष कहा गया है।

प्रदोष के समय महादेव जी कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं। और देवता उनके गुणों की स्तुति करते हैं।

अर्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखने वालों को प्रदोष में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

दरिद्रता और दुख के समुद्र में डूबे हुए मनुष्य के लिए यह प्रदोष व्रत पार लगाने वाली नौका है।

भगवान शिव की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मृत्यु, दुख,से मुक्त होता है।

तथा बड़े से बड़े ऋण से मुक्त होकर धन संपत्ति प्राप्त करता है।

स्कंद पुराण के ब्राह्मखंड-ब्रम्होत्तरखण्ड में प्रदोष व्रत की विधि बताई गई है।

आइये जानते हैं क्या है प्रदोष व्रत और उसके नियम। इस लेखमें आप पाएंगे-

  • प्रदोष व्रत क्या है।
  • कौन सी पूजनसामग्री से भगवान शिव होते हैं प्रसन्न।
  • पूजन करने की क्या विधि है।
  • भगवान शिव की कौन से स्तुति करें।
  • प्रदोष व्रत का प्रभाव व महत्व क्या है।

प्रदोष व्रत कब व कैसे करें। When and how to do Pradosh fast.

  • दोनों पक्षों ( कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।
  • सायंकाल के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। प्रदोष काल में त्रयोदशी के दिन भगवान आशुतोष की पूजा की जाती है।
  • अतः इसे ही प्रदोष व्रत कहते हैं। यह समस्त दोषों का परिहार करने वाला माना जाता है।
  • इस प्रकार 1 वर्ष में में दोनों पक्षों की कुल 24 त्रयोदशी में प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत में पूजन सामग्री से भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न। How to please Lord Shiva with worshiping material in Pradosh Vrat.

  • प्रदोष व्रत में भगवान शिव को यज्ञोपवीत, वस्त्र, आभूषण,अर्पित करें।
  • परम पवित्र अष्टांग युक्त चंदन चढ़ावे।
  • बिल्व, मदार, लाल कमल, धतूरा, कनेर का फूल, चमेली, कुशा, अपामार्ग, तुलसी, जूही, चंपा, भटकटैया और कर्मवीर के फूलों में से जितने मिल जाएं उन सबको चढ़ावे।
  • शहद, दही, दूध, घी, गंगाजल, जल भी अर्पित करें।
  • धूप दीप व नैवेद्य समर्पित करें। नैवेद्य हेतु पूड़ी, सब्जी, पुआ, गुड़ व शक्कर से बने हुए पदार्थ एवं खीर बनावे।
  • मुख शुद्धि के लिए पान अर्पित करें ।धूप, आरती, सुंदर छत्र, उत्तम दर्पण भी मंत्रों द्वारा विधि पूर्वक समर्पित करें।
  • किन्तु भगवान शंकर भक्ति पूर्वक चढ़ाए हुए फूलों से भी संतुष्ट हो जाते हैं।
  • अतः जो भी सामग्री उपलब्ध हो उसी से भक्ति पूर्वक पूजा करें।

प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजन।How to worship in Pradosh Vrat.

  • स्कन्दपुराण में शांडिल्य मुनि द्वारा ब्राम्हणी को बताई गई पूजनविधि इस प्रकार है।
  • दोनों पक्षों की त्रयोदशी को निराहार व्रत करें। सूर्यास्त से तीन घड़ी पहले नहा लें। सफेद स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • मौन होकर भगवान शिव की पूजन करे। आत्म शुद्धि और भूत सिद्धि करके प्राणायाम करें।
  • फिर परम शिव का ध्यान करके पीठ के वाम भाग में गुरु को प्रणाम करें ।
  • दक्षिण भाग में गणेश जी को, दोनों कंधों और जांघों में धर्म ज्ञान वैराग्य तथा ऐश्वर्य का न्यास करें ।
  • नाभि तथा पार्श्वभागों में अधर्म, अज्ञान अवैराग्य और अनैश्वर्य आदि का न्यास करें ।
  • ह्रदय में अनंत आदि का न्यास करके देव पीठ पर मंत्र का न्यास करें।
  • फिर भगवान शिव का ध्यान करके उनके वाम भाग में उमादेवी का चिंतन करें।
  • क्रमशः गन्ध आदि से मानसिक पूजा करें।फिर मूलमंत्र से तीन बार ह्रदय में ही पुष्पांजलि दें।

प्रदोष व्रत की पूजा का संकल्प कैसे करें। How to resolve the worship of Pradosh Vrat.

  • इसके बाद सिंहासन पर बैठे महादेव जी का पूजन प्रारम्भ करें।तथा हाथ जोड़कर मन ही मन संकल्प पढें।
  • “हे भगवान शंकर! आप ऋण, पातक, दुर्भाग्य और दरिद्रता आदि की निवृत्ति तथा संपूर्ण पापों का नाश करने के लिए मुझ पर प्रसन्न होइए ।
  • मैं दुख और शोक की आग में जल रहा हूं। संसार भय से पीड़ित हूं। अनेक प्रकार के रोगों से व्याकुल और दिन हूँ।
  • वृषवाहन ! मेरी रक्षा कीजिए। देवदेवेश्वर सबको निर्भय कर देने वाले महादेव जी आप यहां पधारें।
  • और मेरी की हुई इस पूजा को पार्वती के साथ ग्रहण कीजिए। इस प्रकार संकल्प और आवाहन करके पूजा आरंभ करनी चाहिए।

किसी भी पूजा की तैयारी कैसे करें ?

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प्रदोष व्रत में कैसे करें शिव अभिषेक । How to do Shiva Abhishek in Pradosh Vrat

  • अब रुद्र सूक्त का पाठ करते हुए शंख के जल से पंचामृत से महादेव जी का अभिषेक करें।
  • मंत्रों से आसन आदि समर्पित करें फिर अर्घ्य और पाद्य निवेदन करें। फिर शुद्ध जल से आचमन करा कर मधुपर्क दें।
  • उसके बाद पुनः आचमन के लिए जल देकर मंत्रोचार पूर्वक स्नान करावे । यज्ञोपवीत वस्त्र आभूषण अर्पण करें।
  • पुष्प अर्पित करें। धूप दीप अर्पित करें। नैवेद्य भोग लगावें। शहद, दही, व जल अर्पण करें।
  • खीर से अग्नि में हवन करें। भोग लगाने के बाद मुखशुद्धि के लिए ताम्बूल (पान) अर्पण करें।
  • अब स्तोत्रों द्वारा स्तुति करके भगवान को साष्टांग प्रणाम करें।फिर परिक्रमा कर प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की कौन से स्तुति करें।Who should praise Lord Shiva in Pradosh Vrat.

प्रदोष व्रत में कैसे करें शिव स्तुति.

जय देव जगन्नाथ जी शंकर शाश्वत। जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुराचित।।जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद। नित्य निराधार जय विश्वंभराव्यय।।

जय विश्वेकवेध्येश जय नगेन्द्रभूषण। जय गौरीपते शंभू जय चंदरार्धशेखर।।जय कोट्यर्कसंकाश जयानन्तगुणाश्रय। जय रुद्र विरुपाक्ष जयाचिन्त्य निरंजन।।जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभंजन। जय दुस्तरसंसार सगरोत्तारण प्रभो।

प्रसीद में महादेव संसारार्तस्य खिद्यत:। सर्वपापभयम हृत्वा रक्ष मां परमेश्वर।। महादारिद्र्यमग्नस्य महापापहतस्य च। महाशोकविनष्टस्य महारोगातुरस्य च।। ऋणभारपरीतस्य दह्यमानस्य कर्मभिः। ग्रहे: प्रपिड्यमानस्य प्रसीद मम शंकर।।

(स्कन्दपुराण ब्रम्हखण्ड-ब्रम्होत्तरखण्ड ७/५९-६६)

प्रदोष व्रत का प्रभाव व महत्व। Effect and importance of Pradosh Vrat.

  • सूत जी कहते हैं कि जो प्रदोष व्रत के परम अद्भुत पुण्यमय महात्मय को, उस व्रत के दिन,
  • शिव पूजन के पश्चात, एकाग्र चित्त होकर सुनता अथवा पड़ता है। उसे सौ जन्म तक कभी दरिद्रता नहीं होती ।
  • और अंत में वह ज्ञान के ऐश्वर्य से युक्त हो भगवान शंकर के परमधाम को प्राप्त होता है ।

शिवस्तुति सुनें

https://youtu.be/QgyTRy04CpM

प्रदोष व्रत कैसे करें से संबंधित समस्त जानकारी स्कंद पुराण में ब्रह्मखंड-ब्रम्होत्तरखण्ड से ली गई है।

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