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प्रणाम कैसे करना चाहिए ! जानिए प्रणाम करने के तरीके व उनका महत्व!How to salute! Know the ways of salutation and their importance!

प्रणाम कैसे करना चाहिए ! स्त्रियों के लिए प्रणाम के क्या नियम है! नमस्कार व प्रणाम में क्या अंतर है! पञ्चाङ्ग व साष्टाङ्ग प्रणाम क्या है।

प्रणाम से जीवन में अभूतपूर्व उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। आइए जानते हैं “कैसे व क्यों करें प्रणाम;, प्रकार व लाभ !!

ऐसी अत्यन्त महत्वपूर्ण जानकारी व प्रणाम व नमस्कार करने का उचित तरीके जरूर जाने जो शास्त्रों में उल्लेखित हैं।

अपने से बड़े व पूजनीय व्यक्तियों से उनकी ऊर्जाको आशीर्वाद के रूप में प्राप्त कर जीवन मे इच्छित लक्ष्य को पा सकते हैं।

इस आर्टिकल में आप पाएंगे-

  1. प्रणाम किसे कहतें हैं।
  2. मार्कण्डेयजी की कथा।
  3. ब्रम्हाजी का वरदान।
  4. प्रणाम के प्रकार।
  5. नमस्कार
  6. पञ्चाङ्ग प्रणाम
  7. साष्टाङ्ग प्रणाम
  8. स्त्रियों के लिए नियम
  9. प्रणाम करने के नियम
  10. किसे प्रणाम करना चाहिए
  11. कैसे करना चाहिए प्रणाम । प्रणाम करने का तरीका।
  12. क्या लाभ हैं प्रणाम करने के ।

1- प्रणाम किसे कहते हैं! What is a salutation!

  • अपने से बड़ों को आदरपूर्वक सम्मान देने व आशीर्वाद प्राप्त करने की अभिवादन प्रक्रिया ही प्रणाम कहलाती है।
  • शास्त्रों में कहा गया है; “अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविते, चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम।।”
  • अर्थात जो व्यक्ति सुशील और विनम्र होते हैं बड़ों का अभिवादन और सम्मान करने वाले होते हैं तथा अपने
  • बुजुर्गों की सेवा करने वाले होते हैं उनकी आयु विद्या कीर्ति और बल यह चारों में सदैव ही वृद्धि होती रहती है।
  • इसीलिए माताएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी पहला उद्बोधन जय-जय करके प्रणाम करने का सिखाती है।

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2- मार्कण्डेयजी की कथा! प्रणाम क्यों व कैसे करना चाहिए ! Story of Markandeji!Why and how should I salute!

  • मारकंडेयजी अल्पायु थे ।उनके पिता ने शीघ्र ही मारकंडेय जी का जनेऊ संस्कार करा कर उन्हें प्रणाम की दीक्षा दी ।
  • और समझाया कि जो भी व्यक्ति तुम्हारे सामने आए उसे प्रणाम करना। यह मार्कंडेय जी का नित्य का नियम था ।
  • जो भी व्यक्ति उनके सामने आता वह उसे प्रणाम किया करते थे।एक बार सप्त ऋषि मारकंडेय जी के सामने आए।
  • और मारकंडेय जी ने उन्हें चरण स्पर्श किया ।तब सप्त ऋषियों ने उन्हें दीर्घायु होने का आशीर्वाद प्रदान किया।
  • किंतु जब उन्हें यह पता चला कि मार्कंडेय जी तो अल्पायु हैं, तब वे मारकंडेय जी को लेकर ब्रह्मा जी के पास गए।

3-ब्रम्हाजी का वरदान! Bramhaji’s boon!

  • ब्रह्मा जी के पास जाकर मारकंडेय जी ने उन्हे चरण स्पर्श किया तब ब्रह्मा जी ने उन्हें दीर्घायु होने का वरदान दिया।
  • तब सप्तऋषियों ने ब्रह्मा जी से कहा कि यह वालक तो अल्पायु है ,अतः हमारा वरदान झूठा साबित होगा।
  • तब ब्रह्माजी ने कहा कि अब यह बालक कई कल्पों तक जीवित रहेगा तथा दीर्घायु रहेगा।
  • जब यमराज मारकंडेय जी के प्राण लेने आए तब शिव ने उन्हें भगा दिया था। अतः चरणस्पर्श आयुवर्धक है।
  • प्रतिदिन में एक बार सरस्वती जिव्ह्या पर विराजमान होती है। बड़ों के आशीर्वाद इसी से फलित होते हैं।

4- प्रणाम के प्रकार ! कौन सा प्रणाम कहाँ पर करना चाहिए। type of greetings! Which salutation should be done where.

1- नमस्कार / प्रणाम कैसे करना चाहिए! How to salute / salute!

नमस्कार
  • नमस्कार भी अभिवादन की प्रक्रिया है। यह प्रणाम का पहला प्रकार है। जिससे हम दूसरों का सम्मान करते हैं।
  • का अर्थ है कि हम अपना अहम त्याग कर दूसरे का सत्कार करते हैं। यह बराबरी वालों से किया जाता है।
  • नमस्कार के तीन तरीके हैं; पहला सिर झुका कर प्रणाम करना, दूसरा हाथ जोड़कर प्रणाम करना,
  • तीसरा सिर झुका कर हाथ जोड़कर प्रणाम करना। ऐसा करने से हमारे अंदर विनम्रता का भाव आता है।
  • तथा इस तरह अहम त्याग से मनोविकारों से मुक्ति मिलती है। और अहंकार दूर होता है।

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2- पञ्चाङ्ग प्रणाम कैसे करना चाहिए ! How to do Panchang Pranam

पञ्चाङ्ग प्रणाम
  • पंचांग प्रणाम ने घुटना तथा हाथ और माथा पृथ्वी परटेक कर आंख देवता की तरफ करके मुख से प्रणाम कहते है।
  • इसे पंचांग प्रणाम कहते जाता है पंचांग प्रणाम में पांच अंगों से प्रणाम किया जाता है।
  • प्रणाम करते हुए हमेशा प्रणाम मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। या मैं आपके सम्मुख मन वचन कर्म से समर्पित हूं,
  • वंदना करते हुए आप से आशीर्वाद मांगता हूं।मुझे असमर्थ को अपनी आज्ञा और सामर्थ्य प्रदान कर उठ कर जीवन में
  • आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।ऐसा कहकर प्रणाम करना चाहिए। वाणी द्वारा मंत्रोचार के साथ प्रणाम किया जाना चाहिए।

3- दण्डवत/साष्टाङ्ग प्रणाम कैसे करना चाहिए! How to do obeisance / prostration!

साष्टाङ्ग/अष्टाङ्ग/दण्डवत प्रणाम
  • साष्टांग प्रणाम को अष्टांग प्रणाम या दण्डवत प्रणाम भी कहा जाता है, जिसमें 8 अंगों से प्रणाम किया जाता है ।
  • “पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरस्तथा। मनसा, वचसा, दृष्टया,प्रणामों अष्टांग मुच्यते।।(पेट कास्पर्श धरतीपर नकरें)
  • दोनों पैर, दोनों हाथ, वक्षस्थल ,आंखें, मन तथा वाकशक्ति से सीधा जमीन परलेट करके एक दंड की भांति अर्थात
  • लकड़ी की भांति अपने पूरे शरीर को धरती में लेट कर जो प्रणाम किया जाता है उसे साष्टाङ्ग प्रणाम कहते हैं।
  • साष्टांग प्रणाम करते समय हमेशा कमर के ऊपर के वस्त्र (उत्तरीय वस्त्र) उतारकर ही प्रणाम करना चाहिए।

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5- स्त्रियों के लिए नियम, जाने स्त्रियों को कैसे करना चाहिए प्रणाम!Rules for women, know how women should do obeisance!

  • स्त्रियों को हमेशा पंचांग प्रणाम ही करना चाहिए शास्त्रों में ऐसा माना गया है कि स्त्रियों द्वारा साष्टांग प्रणाम करने से
  • धरती रसातल को जाती है। क्योंकि स्त्री का गर्भ और वक्षस्थल कभी भी जमीन से स्पर्श नहीं होना चाहिए।
  • क्योंकि गर्भ में सारी सृष्टि का चक्र चलता है और वक्ष से जीवन को पोषण मिलता है।
  • उसका स्पर्श धरती माता झेल नहीं पाती अतः धरती रसातल को चली जाती है।
  • जो ऐसा करते हैं उन्हें करने से मना करना चाहिए अन्यथा देखने वाले को भी इसका दोष लगता है।

6- प्रणाम करने के नियम ! Rules to bow down!

  • मंदिर में ठाकुर जी को बाएं रखकर प्रणाम करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा पंचांग प्रणाम करना चाहिए ।
  • गुरुदेव को सामने से प्रणाम करना चाहिए। नदी को या सवारी को जहां से वह आ रहे हो, अर्थात
  • उनके उद्गम स्थल से प्रणाम करना चाहिए। मंदिर के पीछे प्रणाम करना चाहि।
  • भोजन व शयन के समय ठाकुर, गुरु, संत, वरिष्ठ या किसी को भी प्रणाम नहीं करना चाहिए।
  • भगवान के सामने किसी अन्य को पहले प्रणाम नही करना चाहिए। इससे विग्रह का अपमान होता है।

7- प्रणाम किसे करना चाहिए ! Who should salute!

  • समान आयु वालों से, अपने से बड़ों से, परमात्मा, देवता, व मनुष्य के 4 गुरु (माता-पिता,आचार्य, गुरुदेव) को करें।
  • प्रणाम हमेशा उन्हीं को करना चाहिए जिनके आचरण अच्छे हो ।
  • एक हाथ से किया गया प्रणाम व ली गई आरती पूर्वकृत पुण्यों का नाश करते हैं।
  • बाएं तरफ से प्रणाम पूर्व कृत्य पुण्य का नाश करता है। भगवान को अष्टांग व माता को पंचांग प्रणाम करते समय
  • भगवान को अपने वाम अंग में रखकर प्रणाम करना चाहिए । अब तक आप जान चुके हैं कि प्रणाम कैसे करना चाहिए।

8-प्रणाम/नमस्कार कैसे करना चाहिए!How to salute!

  • नमस्कार करते समय हाथों को जोड़ते समय अंगुलियां ढीली रखें। अंगुलियों के बीच में अंतर ना रखें।
  • हाथों की अंगुलियों को अंगूठे से दूर रखें। हथेलियों को एक दूसरे से ना सटाएं उनके बीच में रिक्त स्थान छोड़ें।
  • मंदिर में प्रणाम करते समय दोनों हथेलियों को छाती के समक्ष एक दूसरे से जोड़करपीठ को आगे की ओर झुकाए।
  • सिर झुकाकर भौहों के मध्य दोनों हाथों के अंगूठे से छुएं। मन को देवता के चरणों में एकाग्र करने का प्रयास करें।
  • फिर हाथ सीधे नीचे ना लाकर ,नम्रतापूर्वक छाती के मध्य भाग को कलाइयों से स्पर्श कर, हाथ नीचे लाना चाहिए।

9- प्रणाम करने का लाभ! Benefits of Greetings!

  • मनुष्य के सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना जाता है। हमारे शरीर की गुरुत्व ऊर्जा या चुंबकीय
  • ऊर्जा हमेशा उत्तरी ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर प्रवाहित होकर अपना चक्कर पूरा करती है। तथा दक्षिणी ध्रुव
  • अर्थात पैरों में असीमित ऊर्जा एकत्रित हो जाती है। पैर ऊर्जा का केंद्र हो जाते हैं। पैरों का हाथों से स्पर्श कर उस
  • असीमित ऊर्जा को ग्रहण करने को ही चरण स्पर्श कहते हैं। पैर के अंगूठे से शक्ति का संचार होता है। अंगूठे में
  • ऊर्जा को प्रसारित करने की शक्ति होती है।अत: बड़ों को प्रणाम करने से इच्छित लक्ष्य को पाने में बल मिलता है।

प्रणाम प्रक्रिया के द्वारा हम अपने जीवन मे गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

https://youtu.be/qSYW5QGsHq8

अतः बच्चों को इस विलुप्त होती हुई संस्कृति को सिखाएं व इसे जीवंत रखने का प्रयास करें ।

प्रणाम कैसे करना चाहिए ! व उसके तरीके क्या हैं । किसे प्रणाम करना चाहिए। उसके क्या लाभ है।यह आप जान चुके हैं ।

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