पश्चिमोत्तानासन करने की विधि व लाभ | Method And Benefits Of Doing Paschimottanasana Total Post View :- 76

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि व लाभ | Method And Benefits Of Doing Paschimottanasana

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि व लाभ | Method And Benefits Of Doing Paschimottanasana ; यह आसन करने से बुढापा दूर रहता है। मेरुदण्ड को लचीला बनाने वाला यह आसन पीठ दर्द व अन्य सभी विकारों में लाभ पहुंचाता है।

आइए बिना देर किए हम आपको पश्चिमोत्तानासन करने की विधि व लाभ के बारे में सरल शब्दों में बताते हैं। आशा है यह जानकारी आपको अवश्य अच्छी लगेगी।

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि

  • यह आसन करने के लिए पृथ्वी पर पीठ के बल लेट जायें तथा दोनों पैरों को सामने की ओर फैला दें।
  • वे परस्पर सटे हुए रहने चाहिए। दोनों हाथों को सिर की और ऊपर फैला दें।
  • अब एक झटके के साथ दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए उठें ।
  • कमर के ऊपरी भाग को सामने ले जाते हुए दोनों हाथों द्वारा दोनों पाँवों के अँगूठों को पकड़ने का प्रयत्न करें।
  • साथ ही, नाक द्वारा एक बार बाँएं घुटने को छूने का प्रयत्न भी करें।
  • ऐसा करते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए तथा दोनों पाँव और हाथ एकदम सीधे तने रहने चाहिएं।
  • यदि प्रारम्भ में लेटकर उठने, तदुपरान्त झटके के साथ उठकर अभ्यास करने में कठिनाई का अनुभव हो तो,
  • फर्श पर बैठने के बाद ही इस अभ्यास को आरम्भ किया जा सकता है।
  • सर्वप्रथम दाँये पाँव के अँगूठे को दायें हाथ से तथा बाँये हाथ से बाँये पाँव के अँगूठे का स्पर्श करें।
  • यदि इस प्रयत्न में पहली बार पूर्ण सफलता प्राप्त न हो तो हाथों को वहीं तक ले जायें, जहाँ तक कि ये आसानी से जा सकें।
  • फिर धीरे-धीरे उन्हें और आगे बढ़ाने तथा अँगूठों को पकड़ने का अभ्यास करना चाहिए।
  • जब अंगूठों को पकड़ने में सफलता मिल जाये, तब नाक को घुटनों से लगाने का प्रयत्न करना चाहिए।
पश्चिमोत्तानासन करने की विधि

उक्त क्रिया को करते समय

  • श्वास धीरे धीरे लेनी तथा छोड़नी चाहिए।
  • नाक द्वारा घुटने का स्पर्श करते समय सिर दोनों बाँहों के बीच में होना चाहिए तथा बाँहें तनी हुई रहनी चाहिएं।
  • अँगूठे पकड़े रहने की स्थिति में 5 से 8 सैकिण्ड तक रहना काफी है।
  • अभ्यास का चक्र पूरा करते समय हाथों से अंगूठों को पकड़ छोड़कर दोनों हथेलियों को पाँवों के ऊपर रखते हुए,
  • उन्हें धीरे-धीरे पीछे की ओर खींच लाना चाहिए।
  • इस प्रकार पजों से जाँघों तक दोनों हथेलियों क्रमशः दोनों पाँवों का स्पर्श करती बनी रहें।
  • उक्त प्रकार से जब एक चक्र पूरा हो जाये,
  • तब 10 सैकिण्ड का विश्राम लेकर पुन: श्वास खींचते हुए अभ्यास को दुहराना चाहिए।
  • कुल तीन बार ही इस क्रम को दुहरायें ।

अर्द्ध- पश्चिमोत्तानासन

  • यदि दोनों पाँवों के अँगूठे एक साथ पकड़ने में कठिनाई का अनुभव हो तो एक पाँव को मोड़कर उसके तलवे को जाँघ से सटा लें,
  • तथा दूसरे पाँव को सीधा फैलाकर उसके अंगूठे को दोनों हाथों से पकड़ने का अभ्यास करें।
  • एक पाँव के अभ्यास में सफलता मिल जाने पर पहले पाँव को मोड़ते हुए यही क्रिया दूसरे पाँव से करें।
  • दोनों पाँवों के अभ्यास क्रम को तीन-तीन बार दुहरायें।
  • जब एक-एक पाँव का अभ्यास सिद्ध हो जाये, तब दोनों पाँवों से पूर्ण ‘पश्चिमोत्तानासन’ का अभ्यास प्रारम्भ करें।

विशेष

  • कुछ अभ्यासी एक-एक पाँव को सीधा उठाकर तथा सिर को झुकाकर हाथों को सीधा रखते हुए भी पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करते हैं ।
  • अतः, जो विधि प्रारम्भ में सुविधाजनक प्रतीत हो, उसी के अभ्यास में प्रयत्नशील होना चाहिए।
  • इस आसन के अभ्यास में मेरुदण्ड पर जोर पड़ता है, अतः प्रारम्भिक अभ्यासी इसमें अत्यधिक जोर न लगायें।
  • कुछ सप्ताहों के नियमित अभ्यास से यह आसन सिद्ध हो जाता है ।
  • इसे 3 से 5 बार तक दुहराया जाता है।

पश्चिमोत्तान आसन करने के लाभ

  • यह आसन मेरुदण्ड को लचीला बनाता है, जिसके कारण बुढ़ापा दूर रहता है
  • तथा वृद्धावस्था में भी मनुष्य सीधा तनकर बैठ, खड़ा हो अथवा चल सकता है।
  • यह मेरुदण्ड के सभी विकारों, पीठ दर्द, उदर रोग, यकृत्-रोग तथा श्वास रोग में हितकर है।
  • मोटापे को भी दूर करता है। इसके अभ्यास से गुर्दे की पथरी तथा श्वास रोग नहीं होते ।
  • मधुमेह दूर करने में बहुत लाभकारी है।
  • स्त्रियों के योनि दोष, मासिक धर्म-सम्बन्धी विकार तथा प्रदर आदि रोगों को दूर करता है।
  • यह सर्दी, जुकाम, खाँसी, दमा, श्वास नली का पुराना शोथ (ब्राङ्काइटिस), प्रमेह, ध्वज-भङ्ग, गठिया, वात, अग्निमांद्य, कब्ज तथा अर्श (बवासीर) रोग में लाभकर है।

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निष्कर्ष

आशा है आपको पश्चिमोत्तानासन करने की विधि व लाभसे सम्बंधित जानकारी अवश्य अच्छी लगी होगी। योगासन के नित्य अभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है। मनुष्य दीर्घायु होता है। अतः योगासन अवश्य करें व दूसरों को भी प्रेरित करें।

लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद

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