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तनावमुक्त जीवन कैसे जियें ?

 मानव जब जन्म लेता है तो वह पूर्णतः तनाव मुक्त होता है, जन्म के पश्चात के कुछ वर्ष भी तनाव मुक्त होते हैं फिर अचानक ऐसा क्या होता है कि जीवन तनावों से घिरने लगता है।हम अपने तनावों के साथ अपने को अकेला महसूस करने लगते हैं। आइये तनाव की शुरुआत को पकड़ने की कोशिश करते हैं। कुछ कारण हैं,जो तनाव को जन्म देते है  वे निम्नानुसार हैं….

1, ज्ञान या बोध-                        

     हम जन्म के समय अबोध होते हैं अतः हमें कोई तनाव नही होता, जैसे जैसे हमें संसार का , वातावरण का ,भूख प्यास , लोगों की उपस्थिति का,बोध होने लगता है हम तनाव ग्रस्त होने लगते हैं। अब देखिए हम जन्म से ही अपने तनाव को दूर भी करते आये हैं इसीलिये बचपन मे तनावजनित समस्या हमे नहीं हुई।बचपन मे जैसे ही हमे तनाव होता था हम जोर जोर से रोते व चिल्लाते थे, तब तुरन्त ही उस तनावपूर्ण स्थान व स्थिति से अलग कर हमें तनावमुक्त कर दिया जाता था। अतःतनाव का पहला कारण ज्ञान यानी जानकारी ( अनावश्यक ज्ञान)का होना है। हम जितनी ज्यादा जानकारियां अपने दिमाग में इकट्ठा करते जाएंगे उतना ही हमारा तनाव बढ़ता जाएगा।अतःयदि आप तनावमुक्त रहना चाहते है तो सर्व प्रथम अपनी अनावश्यक जानकारियों के स्रोतों को खत्म करें।

 2, व्यक्तिशः सम्पर्क-     

                         हम जितने ज्यादा लोगों के सम्पर्क में व्यक्तिशः या प्रत्यक्षतः रहेंगे, हमारा तनाव बढ़ता ही जावेगा। क्योंकि जितने मन उतनी ही भावना की,  विचारों की तरंगें होती है जो हमारे सम्पर्क के दायरे के अनुसार अंतरिक्ष मे हमारे चारों ओर घेरा बनाकर हमे घेरे रहती है और हमारे मन को पूरे समय विभिन्न विचारों से संचालित करती रहती है और जो हमारे जीवन मे बहुत बड़े तनाव का कारण होता है। इस कारण को दूर करने के लिए हमे अपना व्यक्तिशः सम्पर्क का दायरा कम करना होगा, इस इंटरनेट की दुनिया मे हम बहुत से ऐसे व्यक्तियों से जुड़े रहते हैं जिन्हें हम जानते तक नही, यहां तक कि हमे जीवन मे कभी भी उनको जानने की जरूरत भी नही पड़नी है किंतु फिर भी हम बिना उद्देश्य उन्हें अपने जीवन मे आमंत्रित कर स्वयं अपनी शांति भंग करते हैं। ये जरूर ध्यान रखें कि जितने भी व्यक्ति हमारे प्रतिदिन सम्पर्क में आ रहें हैं, उनकी हताशा, निराशा,बेचैनी,तनाव,नकारात्मता व बुरे विचारों का भी हमसे रोज सम्पर्क हो रहा है। आप भले ही एक सन्देश मात्र का आदान प्रदान करते हों जैसे सुप्रभात, शुभरात्रि आदि किन्तु वह सन्देश जिस स्थान जिस व्यक्ति से चलकर हम तक आ रहा है उसमें उनकी भावनाओं का समावेश होता ही है, अतः सावधान हो जावें उन सम्पर्को से दूरी बनाए जिन्हें अपने अपनी फ़्रेंडलिस्ट में मात्र इसलिए रख छोड़ा है कि वह आपके मन  के अहंकार को पुष्ट करते हैं कि मुझे बहुत लोग जानते हैं या मैं बहुतों को जानता हूँ।

3.अकर्मण्यता-   

                            हमारे जीवन मे तनाव का एक बहुत बड़ा कारण है अकर्मण्यता अर्थात कुछ नही करना, हाथ पर हाथ धरे बैठना, या सारहीन कार्यों में लगे रहना ये सभी अकर्मण्यता की श्रेणी में आते हैं। अपने देखा होगा बच्चे जितने ज्यादा छोटे होते हैं उनमें तनाव उतना ही कम होता है, क्योंकि छोटे बच्चे पूरे समय एक्टिव रहते हैं वे कुछ काम तो नही करते पर हाथ पांव चलाते ही रहते हैं जिससे उनके शरीर मे क्रियाशीलता बनी रहती है और यही क्रियाशीलता मन को प्रसन्न रखती है। अतःजीवन मे तनाव को खत्म करना चाहते हैं तो क्रियाशील बने रहे , सकारात्मक कार्यों में मन व शरीर को लगा कर रखें,इससे आपके शरीर व मस्तिष्क में रक्त का संचालन होते रहेगा। आपने देखा होगा कि तनाव की स्थिति में शरीर मे विशेष तरह का कड़ापन व नसों में खिंचाव सा महसूस होता है, और कुछ एक्सरसाइज करने मात्र से शरीर मे लचीलापन व नसों में मृदुलता आ जाती है तथा इसीके साथ हमारा तनाव भी खत्म हो जाता है। अतः क्रियाशील बने रहें।

4. मन की चंचलता-     

                          जो क्रियाशील नही होते उनका मन क्रियाशील हो जाता है,जो मस्तिष्क को एक विचार और कार्य पर स्थिर नही होने देता, जिस कारण कभी भी हाथ मे लिया हुआ कार्य पूरा नही हो पाता और मन मे खिन्नता व निराशा का जन्म होने लगता है फिर तनाव की स्थिति निर्मित हो जाती है। अतः तनाव को खत्म करने के लिए मन को स्थिर रखना बहुत आवश्यक है और इसके लिए जीवन मे ध्यान को विशेष स्थान दें। जितनी भी आपकी आयु हो उतने मिनट का ध्यान प्रतिदिन अवश्य करें या कम से कम 20 मिनट का ध्यान प्रतिदिन अवश्य करना चाहिए । यह हमारे जीवन को तनावमुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 5.मौन का अनुकरण-   

                               हमारे शब्द हमारे मन मे उठ रहे विचारों की ही परिणीति होते हैं, जैसे ही कोई विचार मन मे जन्म लेता है वह तत्काल शब्दो  का रूप लेकरर हमारे मुख से बाहर निकल पड़ता है, तब उस समय मौन का अनुकरण करना यानी मौन रहकर हम अपने मन के विचारों को नियंत्रित कर मन को स्थिर कर सकते हैं। मनकी अस्थिरता ही तो तनाव को जन्म देती है, जैसे ही हमने मन को नियंत्रित कर स्थिर कर लिया वहीं हमने अपने जीवन को तनावों से मुक्त करने में सफलता प्राप्त कर ली। ये हैं तो सभी छोटी छोटी सी बातें जिन पर व्यस्तता के कारण हम कभी गौर नही कर पाते, क्योंकि हम  स्वयं के लिए कभी जीते ही नही है। 

6. स्वयं के लिए जियें- 

                                हमे तनाव तभी होता है जब हम स्वयं के लिए कभी भी नहीं जीते। इसका अर्थ है कि हम जो भी काम करें उसमें स्वयं को प्राथमिकता दें। अक्सर हम प्रत्येक कार्य अपनी जिम्मेदारी समझ कर मजबूरी में करते है किंतु आज से प्रत्येक कार्य मे स्वयं की उपयोगिता को जोड़कर कार्य करें। सुबह उठें तो अपने लिए कुछ करें, परिवार के किसी भी कार्य को करें तो उन कार्यों में एक कार्य अपने लिए जरूर करें। इस तरह से आपके मन मे आत्मविश्वास पैदा होगा कि आपकी उपस्थिति का कितना महत्व है, क्योंकि जब तक आप स्वयं को महत्व नही देंगे, दूसरे के द्वारा दिया गया महत्व आपको परिपूर्ण या सन्तुष्ट नही कर पायेगा । मजबूरी व जिम्मेदारी का जीवन विभिन्न तनावों को जन्म देता है। अतः तनाव मुक्त रहना है तो स्वयं के लिए जीना सीखें।

7. प्रसन्न रहें-           

                    यह सही है कि प्रसन्नता कोई ऐसी वस्तु नही है जिसे हम सोचकर पा लें। किन्तु प्रसन्न रहने के लिए हमे ऐसे माहौल का निर्माण करना होता है जहां चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ हों पर ये भी आसान नहीं है, इसलिए हमें एक ऐसा नियम बनाना चाहिए, की जिस तरह से हमे नित्यकर्म, निश्चित कर्म करने आवश्यक है उसी तरह क्यों न जीवन मे 24 घण्टों में 1घण्टे का समय ऐसा निकालें जब हमें हर हाल में खुश रहना है। कोई हमे डाटें, नाराज हो,कोई मुश्किल हो,या बीमारी घेरे फिर भी दिन का एक घण्टे हमे सिर्फ खुश रहना है।दिन के एक घंटे खुश रहकर हम बहुत हद तक अपने जीवन की मुश्किलों को अपने से दूर कर तनावमुक्त हो सकते हैं, अब ये आप स्वयं निश्चित करें कि आप स्वयं को प्रसन्न करने के लिए क्या करते हैं।( जैसे नृत्य, गायन, ड्राइंग, पूजा, समाजसेवा या अन्य कुछ भी) 

                                 आप देखेंगे कि सारी शक्तियां आपके अंदर मौजूद है. कोई भी परिस्थिति या कोई भी व्यक्ति आपको दुखी या तनावयुक्त नही कर सकता। एक गहरी साँस ले जीवन मे नई शुरुआत करें, और आप देखेंगे कि ये छोटे छोटे सूत्र किस तरह आपके जीवन को तनाव मुक्त कर एक खुशहाल जीवन प्रदान करेंगे।

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