चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति हिंदी में अर्थ सहित !! Total Post View :- 10079

चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति हिंदी में अर्थ सहित !!

नमस्कार मित्रों !! चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति से भक्तजन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं । तथा विपत्तियों से स्वयं की रक्षा हेतु इस स्तुति का गान करते हैं । इसके करने से जीवन की सभी बाधाएं चुटकियों में हल हो जाती है। आपकी सुविधा के लिए हिंदी में अर्थ सहित चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति समस्त जानकारी के साथ प्रस्तुत है।

सावन मास में किसी भी रूप में भगवान भोलेनाथ की स्तुति अवश्य करनी चाहिए। जाने अनजाने में किये जाने वाले समस्त पापों से मुक्त करती है। आइये पढ़ते हैं

चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति !!

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चंद्रशेखर पाहिमाम् ।

चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर रक्ष माम् ।। •

रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रङ्ग निकेतनं,

सिञ्जिनीकृत-पन्नगेश्वर मच्युता नलसायकम्।

क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभि वन्दितं,

चंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः !!१||

पञ्च पादप पुष्प गन्धि पदाम्बुज द्वय शोभितं,

भाल लोचन जात पावक-दग्ध मन्मथ विग्रहम्।

भस्मदिग्ध कलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं,

चंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः।।२।।

मत्तवारण मुख्य चर्म कृतोत्तरीय-मनोहरं,

पङ्कजासन-प लोचन -पूजिताडि घ्रसरोरुहम्।

देव सिद्ध तरङ्गिणी कर सिक्त शीत जटा धरं,

चंद्रशेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ।।३।।

यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंग-विभूषणं,

शैलराज सुतापरिष्कृत चारूवाम कलेवरम्।

क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं,

चंद्रशेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥४॥

कुण्डलीकृत-कुण्डलेश्वर-कुण्डलं वृषवाहनं,

नारदादि मुनीश्वरस्तुत वैभवं भुवनेश्वरम्।

अन्धकान्तक माश्रिता मरपादपं शमनान्तकं,

चंद्रशेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ।।५।।

भैषजं भवरोगिणा-मखिला पदा मपहारिणं,

दक्षयज्ञ विनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।

भुक्ति-मुक्ति फलप्रदं सकलाघ संघ निबर्हणं,

चंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥६॥

भक्तवत्सल मर्चितं निधिमक्षयं हरिदम्बरं,

सर्वभूतपतिं परात्परम प्रमेयमनुत्तमम्।

भूमि वारि नभो हुताशन- सोम पालित स्वाकृतिं

चन्द्रशेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ।।७।।

विश्व सृष्टि विधायिनं पुनरेव पालनतत्परं,

संहरन्तमथ प्रपञ्चम शेषलोक निवासिनम् ।

क्रीडयन्त महर्निशं गणनाथ यूथ समन्वितं,

चंद्रशेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यम ||८||

मृत्युभीत-मृकण्डु-सूनू-कृतस्तवं शिवसन्निधौ,

यत्र कुत्र च यःपठेन्नहि तस्य मृत्यभयं भवेत्।

पूर्ण मायुर रोगिताम-खिलार्थ सम्पद मादरं ,

चन्द्रशेखर एवं तस्य ददाति मुक्त्मियत्नतः ।।९।।

चन्द्रंशेखर …..

चंद्रशेखर अष्टकम् (शिव स्तुति) का हिंदी में अर्थ !!

  • हे चन्द्रशेखर(चन्द्र है सिर पर जिनके,भूतभावन परमपावन देवाधिदेव महादेव),चन्द्रशेखर!चन्द्रशेखर!
  • मुझको बचाओ! मेरी रक्षा करो।।१।।
  • कैलाश के शिखर पर जिनका निवासगृह है,जिन्होंने मेरुगिरि का धनुष,नागराज वासुकी की प्रत्यंचा और
  • भगवान् विष्णु को अग्निमय बाण बनाकर तत्काल ही दैत्यों के तीनों पुरों को दग्ध कर डाला था।
  • सम्पूर्ण देवता जिनके चरणों की वन्दना करते हैं, उन चन्द्रशेखर भगवान् शंकर की मैं शरण लेता हूँ,
  • यमराज मेरा क्या करेगा।।२।।
  • मन्दार,पारिजात,सन्तान,कल्पवृक्ष और हरिचन्दन – इन पांच दिव्य वृक्षों के पुष्पों से सुगन्धित युगल चरण कमल
  • जिनकी शोभा बढ़ाते हैं, जिन्होंने अपने ललाटवर्ती नेत्र से प्रकट हुई अग्नि-ज्वाला में कामदेव के
  • शरीर को भस्म कर डाला था। जिनका श्री विग्रह सदा भस्म-विभूषित रहता है,जो भव की उत्पत्ति के कारण होते
  • हुए भी भव(संसार) के नाशक हैं तथा जिनका कभी विनाश नहीं होता,
  • उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ, यमराज मेरा क्या करेगा।।३।।
  • जो मतवाले गजराज के मुख्य चर्म की चादर ओढ़े परम मनोहर जान पड़ते हैं,
  • ब्रह्मा और विष्णु भी जिनकी पूजा करते हैं तथा जो देवताओं और सिद्धों की नदी गंगा की तरंगों से
  • भीगी हुई शीतल जटा धारण करते हैं,उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ,यमराज मेरा क्या करेगा।।४।।
  • कुण्डली मारे हुए सर्पराज जिनके कानों में कुण्डल का काम देते हैं, जो वृषभ पर सवारी करते हैं,
  • नारद आदि मुनीश्वर जिनके वैभव की स्तुति करते हैं, जो समस्त भुवनों के स्वामी,
  • अन्धकासुर का नाश करने वाले,आश्रित जनों के लिए कल्प वृक्ष के समान और यमराज को भी
  • शान्त करने वाले हैं,उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ, यमराज मेरा क्या करेगा।।५।।

चंद्रशेखर अष्टकम् (शिव स्तुति) का हिंदी में अर्थ !!

  • जो यक्षराज कुबेर के सखा,भग देवता के नयन हरण करने वाले और सर्पों के आभूषण धारण करने वाले हैं,
  • जिनके श्रीविग्रह के सुन्दर वामभाग को गिरिराज किशोरी उमा ने सुशोभित कर रखा है,
  • कालकूट विष पीने के कारण जिनका कण्ठभाग नीले रंग का दिखाई देता है,
  • जो एक हाथ में फरसा और दूसरे में मृग लिए रहते हैं,उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ,
  • यमराज मेरा क्या करेगा।।६।।
  • जो जन्म-मरण के रोग से ग्रस्त पुरुषों के लिए औषधरूप हैं, समस्त आपत्तियों का निवारण और
  • दक्षयज्ञ का विनाश करने वाले हैं, सत्व आदि तीनों गुण जिनके स्वरूप हैं,
  • जो तीन नेत्र धारण करते,भोग और मोक्ष रूपी फल देते तथा सम्पूर्ण पापराशि का संहार करते हैं,
  • उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ,यमराज मेरा क्या करेगा।।७।।
  • जो भक्तों पर दया करने वाले,अपनी पूजा करने वाले मनुष्यों के लिए अक्षय निधि होते हुए भी
  • जो स्वयं दिगम्बर रहते हैं,जो सब भूतों(प्राणियों) के स्वामी,परात्पर,अप्रमेय और उपमा रहित हैं,
  • पृथ्वी,जल,आकाश,अग्नि और चन्द्रमा के द्वारा जिनका श्री विग्रह सुरक्षित है,
  • उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ,यमराज मेरा क्या करेगा।।८।।
  • जो ब्रह्मा रूप से सम्पूर्ण विश्व की सृष्टि करते,फिर विष्णु रूप से सबके पालन में संलग्न रहते हैं
  • और अंत में सारे प्रपंच का संहार करते हैं।सम्पूर्ण लोकों में जिनका निवास है
  • तथा जो गणेश जी के पार्षदों से घिरकर दिन रात अनेकों तरह की क्रीडा करते हैं,
  • उन भगवान् चन्द्रशेखर की मैं शरण लेता हूँ,यमराज मेरा क्या करेगा।।९।।

अंत मे !

मृत्यु से भयभीत मृकण्ड ऋषि के पुत्र(मार्कण्डेय) के द्वारा की गई यह स्तुति जो जहां कहीं भी पढ़ता है उसे मृत्यु का भय नहीं होता। आशा है चंद्रशेखर अष्टकम् शिव स्तुति से सम्बंधित समस्त जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रों व परिजनों को अवश्य शेयर करें।

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