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कैसे बनाएं सकारात्मक सोच !How to make positive thinking!

कैसे बनाएं सकारात्मक सोच! सकारात्मकता हमारे आसपास बिखरी हुई है। बस जरूरत है उस दृष्टिकोण की ,उस दृष्टि की जिससे हमें वह दिखाई दे।
जिन्हें जीवन मे अपनाकर हम अपना व अपने आसपास के लोगों का जीवन सुखमय व सफल बना सकते हैं।
आपको कभी परम आदरणीय शिव खेड़ा जी की पुस्तक “you can win” उपलब्ध हो सके तो अवश्य पढ़ें ।
कुछ पुस्तकें जीवन के मूल्यों को सिखाती हैं। जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखती है।
उसी पुस्तक की कुछ झलक अपने शब्दों में आपके लिए लेकर आई हूँ। आप अवश्य लाभान्वित होंगे।
यदि आप स्वयं को एक सकारात्मक व्यक्ति बनाना चाहते हैं, तो अपने जीवन मे निम्न परिवर्तन लाने होंगे;

1.जिम्मेदारी स्वीकार करें- Accept responsibility-

  • जो भी कार्य आप करें, उस प्रत्येक कार्य के सफल या असफल होने की जिम्मेदारी स्वयं लें।
  • इससे आप कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ जुड़ेंगे।
  • इस प्रकार सफल होने पर आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

2- सहानुभूति का व्यवहार करें; Behave sympathetically

सभी से सहानुभूति रखें
  • प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख – दुःख आते जाते रहतें हैं।
  • किंतु अपने स्वार्थ से पहले दूसरों के लिए सोचना ही सहानुभूति है।
  • दूसरों की तकलीफें समझकर उसे दूर करने का प्रयास करें।
  • इससे आपको जो सुकून प्राप्त होगा, वह आपके जीवन मे सकारात्मकता को लाएगा।(कैसे बनाएं सकारात्मक सोच!)

3- अपने शब्दों का चुनाव सावधानी से करें; Choose your words carefully;

  • ” कागा काको धन हरे , कोयल काको देत, मीठे वचन सुनाई के जग अपनों कर लेत।।”
  • शब्द केवल ध्वनि नही एक आकृति होते हैं।
  • जैसे ही आप किसी भी शब्द जैसे “माँ” का उच्चारण करतें हैं वैसे ही माँ की आकृति मस्तिष्क में उभरती है।
  • ऐसे ही जितने अच्छे शब्दों का आप उच्चारण करते हैं उतनी ही सुंदर आकृति मस्तिष्क में बनती है।
  • और जितने अभद्र व अशोभनीय शब्दों का उच्चारण करेंगे मस्तिष्क वैसी ही कल्पना करता है।
  • अतः अच्छे शब्दों का प्रयोग नियमित जीवन चर्या में बोलने का अभ्यास करें।

4- आलोचना व शिकायत न करें- Do not criticize and complain-

  • आलोचना व शिकायत असन्तुष्ट जीवन की ओर इशारा करता है।
  • प्रत्येक विषय, वस्तु व घटना के दो पहलू होतें हैं।
  • एक व्यक्ति हर समय कमियां व गलतियां ढूंढने में माहिर होता है।
  • वहीं एक व्यक्ति उस कमी या गलती को भी उस वस्तुविशेष की विशेषता के रूप में देखता है।
  • गलत को गलत कहना सही है, किन्तु हमेशा आलोचना करना गलत है।
  • इसी तरह हमेशा शिकायत करने वाला स्वभाव भी नकारात्मक होता है। अतः इस दुर्गुण से स्वयं को दूर रखें।

5-दयालु व ईमानदार बनें –Be kind and honest –

सभी के प्रति दयाभाव रखें।
  • किसी भी व्यक्ति का मन तभी कोमल व दयालु हो सकता है, जब उसमे कोमल भाव हों।
  • दूसरों के दुख में दुखी होना, ह्रदय की पवित्रता व शुद्धता को बताता है।
  • दयालुता सच्चे स्वरूप में होनी चाहिए , न कि उसका दिखावा हो।
  • केवल शब्दों से ही नही वरन् कर्मों से भी दयालुता को अपनाकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।
  • दिखावे की दयालुता आपके व्यक्तित्व को नष्ट करती है।

6-दूसरों के लिए सकारात्मक सोचें; Think positively for others;

  • हमेशा किसी भी व्यक्ति की सफलता व तरक्की पर संदेह करना गलत है।
  • सभी के प्रति मन मे सकारात्मक सोचें।
  • क्योंकि सोच आपकी अपनी है,और आपके ही विचारों से उतपन्न होती है।
  • आप जैसा सोचेंगे, दूसरा भी आपके लिए वैसा हो सोचेगा।

7- अच्छे श्रोता बनें- Be a good listener-

अच्छा श्रोता ही भविष्य का अच्छा वक्ता होता है।
  • बोलने व समझाने वाले तो बहुत से लोग मिल जाते हैं, किंतु सुनने व समझने वाले बहुत कम ही होतें हैं।
  • अतः सुनने का प्रयास करें।
  • सुनने की आदत से आप स्वयं तो लाभान्वित होंगे ही, दूसरों को भी उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं।(कैसे बनाएं सकारात्मक सोच!)

8- उत्साही बनें- Be enthusiastic

हमेशा उत्साहित रहें।
  • किसी भी कार्य मे सफल होने की कुंजी मन का उत्साह ही है।
  • आप कितने भी सक्षम क्यों न हो,
  • यदि आपके मन मे उत्साह नहीं है तो आप किसी भी कार्य को पूर्ण नहीं कर सकते।
  • उत्साही व्यक्ति को सभी पसन्द करते हैं।
  • वह अपने उत्साही स्वभाव से सभी के मन में उत्साह पैदा कर देता है।

9- ईमानदार बने व ईमानदारी से सभी की सराहना करें Be honest and sincerely appreciate everyone.

ईमानदारी सच्चा आभूषण है।
  • प्रत्येक कार्य को ईमानदारी से करें।
  • चाहे आपके कार्य को कोई देखे या न देखे।
  • क्योंकि अकेले में आप वह होते हो, जो आप सचमुच हो।
  • अतः स्वयं से ईमानदार रहें।
  • दूसरों के कार्यों की सराहना पूर्ण ईमानदारी से करें।
  • न किसी को खुश करने के लिए झूठी तारीफ करें।
  • और न ही किसी से द्वेष भाव होने से उसे नीचा दिखाने का प्रयास करें।

10-यदि आपसे कोई गलती हो तो उसे स्वीकार कर आगे बढ़ें- If you have any mistake, accept it and proceed-

  • गलतियाँ मनुष्य की कमजोरी नही बल्कि, कार्य करने का गलत तरीका है।
  • तरीका गलत हो सकता है, आप नहीं।
  • अतः गलती स्वीकार कर, सही तरीका अपनाकर आगे बढ़ें वहीं पर न अड़े रहे।

“आपो दीपो भव”- कहर ढाता 2020, एक पत्र आपके नाम !!

11- चर्चा करें बहस नहीं- Discuss not debate-

  • अक्सर विवाद के विषय बहुत छोटे होते हैं किंतु बहस के कारण उनमे भयावहता आ जाती है।
  • एक ओर किसी विषय पर चर्चा , निष्कर्ष प्रदान करती है।
  • वहीं बहस आपस मे खिन्नता, दूरी और वैमनस्यता लाती है।
  • अतः बहस प्रारम्भ होते ही उससे दूर हो जाएं।

12- गपशप न करें- Do not gossip-

गपशप न् करें।
  • जीवन बहुमूल्य है, उसे रचनात्मक कार्यों में लगाएं।
  • किसी भी व्यक्ति को लेकर की गई टीकाटिप्पणी ही गपशप कहलाती है।
  • जो तीन तरह से होती है 1. वस्तुओं से सम्बंधित, 2. व्यक्तियों से सम्बंधित,3- घटनाओं से सम्बंधित।
  • अक्सर इन बातों का कोई ओर-छोर नहीं होता।
  • गपशप का मकसद मात्र निचले दर्जे का मनोरंजन होता है।
  • इसमें कोई सत्यता नही होती।
  • यह अक्सर किसी को अपमानित करने के लिए होती है।
  • अतः स्वयं को गपशप से हमेशा दूर रखें।

13- अपने वचनों का पालन करें;- Follow your words; –

  • स्वयं के द्वारा स्वयं को या किसी अन्य को आपने कोई वादा किया या वचन दिया हो तो उसे अवश्य पूरा करें।
  • इससे आपकी वाणी में इतनी शक्ति उतपन्न हो जावेगी की धीरे धीरे जो आप कहेंगे वही सत्य होना शुरू हो जाएगा।
  • अतः कभी भी ऐसे वचन न दें, जिन्हें पूर्ण करना आपके लिए सम्भव न हो।

14- सदा आभारी रहें किन्तु किसी को स्वयं के द्वारा आभारी महसूस न कराएं- Always be grateful but don’t make anyone feel grateful by yourself-

सभी का आभार माने।
  • कोई व्यक्ति आपके लिए कुछ भी करे तो उसका आभार जरूर माने।
  • किन्तु आप किसी के लिए कुछ भी करें तो उसे ऐसा न जतायें की अपने उस पर बड़ा आभार किया है।
  • अर्थात किसी के द्वारा की गई मदद कभी भूलें नहीं। और किसी के लिए आपने कोई मदद दी हो तो उसे याद न रखें।

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15- भरोसेमंद बने – Be Trusted

भरोसेमंद बने।
  • किसी का भी भरोसा कभी भी न तोड़ें।
  • जितना ज्यादा आप भरोसेमंद व वफादार रहेंगें लोगों की आपके प्रति श्रद्धा व विश्वास जुड़ता जाएगा। (कैसे बनाएं सकारात्मक सोच!)

16-दृढ़ता व सच्चाई का अभ्यास करें- Practice perseverance and truth-

  • अपने कार्यों व विचारों में स्थिर रहें ।
  • बार बार विचार बदलना अस्थिर मानसिकता को दिखाता है।
  • जो आपको समाज मे अविश्वसनीय बनाता है।
  • अपनी बातों और कार्यों में सच्चाई रखने का प्रयास करें।

17- सभी का ख्याल रखें, विनम्र बने- Take care of everyone, be polite-

विनम्रता विद्वान होने की सूचना है।
  • सिर्फ अपने बारे में सोचने वाले स्वार्थी कहलातें है, जिन्हें कोई पसन्द नही करता।
  • वहीं सबका ख्याल रखने वालों का सभी ख्याल रखते हैं।
  • हमेशा विनम्र बने रहें।
  • विनम्रता एक स्वाभाविक गुण है।
  • दिखावे की विनम्रता अलग ही दिखती है। अतः सच्ची विनम्रता सीखें।

18- हँसमुख बने, कड़वा न बोलें, व दूसरों को नीचा न दिखाएं- Be cheerful, do not speak bitter, and do not let others down-

हर परिस्थितियों में खुश रहें।
  • हमेशा खुश रहना, मधुरभाषी होना, व दूसरों को सम्मानित करना ये ऐसे गुण हैं जो समाज मे आपकी प्रतिष्ठा को बढाते हैं।
  • तथा आपके लिए तरक्की का मार्ग बनाते हैं।
  • अतः हमेशा हँसमुख बने, कड़वा न बोलें।
  • सभी का सम्मान करें व किसी को भी नीचा दिखाने का कभी भी प्रयास नहीं करना चाहिए।
  • हर परिस्थितियों में खुश कैसे रहें, जानने के लिए सुने      https://youtu.be/9LhhBcAdWyQ

19- सभी के मित्र बनें- Be friends with everyone-

सभी के मित्र बनें।
  • मित्रता का रिश्ता वह होता है जो दुख व विपरीत परिस्थितियों में भी रिश्ता कायम रहता है।
  • श्रीकृष्ण ने एक आदर्श मित्र के रूप में ही अवतार लेकर द्वापर युग मे जन्म लिया था।
  • वे अर्जुन के, सुदामा के, राधारानी के, ग्वालों के , ग्वालिनों के व अन्य सभी के मित्र थे।
  • अर्थात मित्र बन कर सभी की परेशानियों को हर लेना अत्यंत ही दुर्लभ प्रवृत्ति है।
  • अतः सच्चे मित्र बने।

कैसे बनाएं सकारात्मक सोच! आशा है यह लेख आपको सकारात्मक बनने में अवश्य मदद करेगा।

इसे अपने मित्रों व परिवारजनों को भी अवश्य भेजें। ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए देखें

http://Indian treasure.in

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12 thoughts on “कैसे बनाएं सकारात्मक सोच !How to make positive thinking!

  1. बहुत अच्छी पोस्ट. इस तरह व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास जरूर संभव है

  2. बहुत श्रेष्ठ प्रयास है आपका…..आप भागवत कथा के शेष भागों को भी summarise करें.. भगवान आपको हमेशा सफलता प्रदान करें…

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