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आलू बंडा; इस नवरात्रि बनाएं फलाहारी आलू बंडा; जरूर ट्राई करें

आलू बंडा; इस नवरात्रि जरूर ट्राई करे। नवरात्रि के आते ही फलाहार बनाने की चिंता सताने लगती है। 9 दिन उपवास रहने के लिए एक सा फ़लाहार करना भी कठिन होता है। ऐसे में मन को भटकने से बचाने के लिए तरह-तरह के फलाहार बनाने पड़ते हैं। महिलाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है।

आज हम इसी चिंता से आप को मुक्त करने के लिए एक बहुत ही स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजन आलू बंडा की रेसिपी बताएंगे जिससे बनाना बहुत आसान होता है। यह बहुत ही सुपाच्य भी होता है तथा इसमें तेल भी कम लगता है।

आलू बंडा की सामग्री

आलू बंडा बनाने के लिए सभी सामग्री उपवास से संबंधित होनी चाहिए। अतः इसमें हम सभी सब्जियों का ही इस्तेमाल करेंगे।

1- सिंघाड़े का आटा

यह उपवास में प्रयोग किया जाता है। यह सिंघाड़े को पीसकर इसका चूर्ण बनाया जाता है जिससे सिंघाड़े का आटा कहते हैं। यह नवरात्रि में बहुत लोकप्रिय माना जाता है। सिंघाड़े की तासीर ठंडी होती है। अतः चैत्र नवरात्रि की गर्मी में यह अत्यंत शीतलता प्रदान करने वाला होता है। सिंघाड़े का आटा बहुत ही पौष्टिक होता है

इसमें अनेक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें आयोडीन और मैग्नीज पाया जाता है जो उन्हें का रोग से बचाव करता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है तथा मोटापे को भी दूर करता है। यह एक जलीय सब्जी होती है अतः इस की तासीर ठंडी होती है स्वाद में यह अत्यंत मधुर होता है। स्टार्ट एकदम सफेद होता है यह एक तरह का स्टार जैसा होता है। इसे तलने के लिए घोल बनाने के काम आता है।

2- खीरा|Cucumber

खीरा में 80 परसेंट पानी होता है। यह अत्यंत सुपाच्य होता है। खीरा ठंडी तासीर का होता है। अतहर चैत्र की नवरात्रि ओं में गर्मी से राहत दिलाता है। इससे आलू मंडी में भरावन के लिए काम में लाया जाता है।

पोषक तत्वों से भरपूर खीरा बहुत स्वादिष्ट लगता है। इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जाता है। इससे अनेक तरह के व्यंजन रायता सलाद आदि बनाए जाते हैं यह सभी को पसंद होता है गर्मी को शांत करता है। शीतलता प्रदान करता है।

3- आलू|Potato

आलू बहुत ही पौष्टिक सब्जी होती है। यह जमीन के अंदर पाए जाने वाली सब्जी है। इसमें जमीन के अंदर मौजूद सभी पोषक तत्व से भरपूर होती है। यह संपूर्ण आहार की तरह काम देती है। इसमें आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

इसको तेल में फ्राई करके नहीं खाना चाहिए। इससे यह नुकसानदायक हो जाता है। आलू को हमेशा उबालकर या भूनकर खाया जाता है। आलू के छिलके के नीचे पोषक तत्व पाए जाते हैं ।

अतः आलू को कभी भी छीलकर नहीं बनाना चाहिए। आलू को छीलने के लिए इसे उबालकर पतला सा छिलका निकाल दिया जाता है । उबले हुए पानी को भी सब्जी में उपयोग कर लेना चाहिए।

ऐसा करने से आलू के समस्त पोषक तत्व हमें प्राप्त हो जाते हैं। फलाहारी आलू बंडा में आलू को भरावन के लिए प्रयोग किया जाता है।

4- हरी धनिया| Coriander

हरी धनिया की महक भोजन को अत्यंत स्वादिष्ट बनाती है। हरी धनिया में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है । लगभग सभी सब्जियों नाश्ते आदि में सजावट के लिए डाली जाती है। इसकी खुशबू और इसके गुण भी ऐसे महत्वपूर्ण बनाते हैं।

इसकी चटनी भी बनाई जाती है और मेरा यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है। भोजन को सुपाच्य बनाती है। यह ठंडी तासीर की होती है। अथवा पेट को ठंडक पहुंचाती है।

5- हरी मिर्च|Green chilli

मिर्च के बिना तो कोई भी भोजन फीका लगता है। मिर्च भोजन की थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।

इसके खाने से मुंह में लार पैदा होती है जो भोजन को पचाने में सहायक होती है। मिर्च का उपयोग अपने स्वाद अनुसार ही करना चाहिए पूर्व श्याम ज्यादा तीखी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए।

6-फल्ली तेल|Peanut oil

तेल का नाम सुनते ही लोग घबरा उठते हैं। वर्तमान में तेल को लेकर काफी बीमारियों का सब लोगों को करना पड़ता है। जिससे उपवास में तैलीय चीजें खाने से डर लगता है। किंतु आपका यह डर हम दूर कर देते हैं।

मूंगफली का तेल उपवास में इसलिए उपयोग किया जाता है। क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल को कम करने की क्षमता होती है। इसमें मौजूद फोलिक एसिड बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

यह कोलेस्ट्रोल को संतुलित भी करता है। आज हम इसी फल्ली तेल का उपयोग आलू बंडा को तलने में करेंगे।

7- सेंधा नमक| Himalayan salt

व्रत में सेंधा नमक का उपयोग किस लिए किया जाता है क्योंकि यह बदहजमी को दूर करता है। यह पाचन तंत्र के लिए बहुत सहायक होता है। गैस खट्टी डकार आदि की समस्या से निजात दिलाता है।

उपवास में हम पूरा दिन खाली पेट रहते हैं । जब हम फलाहार करते हैं तो ऐसे में पेट संबंधी समस्याएं होना लाजिमी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे विद्वान पूर्वजों ने उपवास में सेंधा नमक का उपयोग करना बताया है। ताकि शरीर को उसके लाभ मिल सके।

फलाहारी आलू बंडा बनाने की विधि

आलू बंडा की समस्त सामग्रियों को जुटाने के बाद अब हम आलू बंडा बनाने की तैयारी करते हैं। सबसे पहले आलू को धोकर उबाल लेंगे। फिर ककड़ी को छीलकर कद्दूकस कर लेंगे। हरी धनिया हरी मिर्च को धोकर बारीक काट लेंगे।

एक कटोरी में गाढ़ा घोल सिंघाड़े के आटे का तैयार कर लेंगे। सिंघाड़े के आटे के घोल में हल्का सा सेंधा नमक मिला देंगे। अब आलू बंडा का भरावन तैयार करने के लिए उबले हुए आलू को छीलकर उसे अच्छी तरह मैश कर लेंगे ।

अब आलू में कद्दूकस किये खीरा का पानी अलग कर अच्छी तरह निचोड कर आलू में मिला लेंगे । इसमें कटी हुई हरी धनिया, हरी मिर्च थोड़ी सी डालेंगे। अब इसे अच्छी तरह मिक्स करके इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक मिला लें।

यह आपका आलू बंडा का भरावन तैयार हो चुका है। इसके छोटे-छोटे गोले बनाकर के सिंघाड़े के आटे के घोल में लपेट लेंगे। कढ़ाई में फल्ली का तेल गर्म करने के लिए चढ़ा देंगे।

अब इसमें छोटे-छोटे गोले को सिंघाड़े के आटे के घोल में लपेटकर कढ़ाई में डालते जाएंगे । गरम तेल में पड़ते ही आलू बंडा सिकने लग जाएंगे । थोड़ी देर में अलट पलट करते हुए सुनहरे रंग के होने तक उन्हें फ्राई करेंगे ।

अब इसे निकाल कर एक प्लेट में रख लें। इसी तरह सारे आलू बंडा तैयार करके अलग निकाल लें। यह आपके शुद्ध फली के तेल में बने हुए फलाहारी आलू बंडा तैयार हो चुके हैं । अब आप इसे दही के साथ खा लेंगे।

अंत में

इस तरह यह समस्त पौष्टिक सामग्रियों से तैयार आलू बंडा उपवास में खाने के लिए एकदम सुरक्षित है। यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। उन्हें चैत्र की नवरात्रि में अवश्य सेवन करें ।इसमें सभी सामग्रियाँ ठंडी तासीर की है जिससे यह आपको ठंडक भी पहुंचाएगी ।

इस प्रकार स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह हेल्थ के लिए भी अच्छे हैं आप इस नवरात्रि अवश्य ट्राई करें। आशा है आलू बंडा की विधि आपको अवश्य अच्छी लगी होगी। अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत आभार!!

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